विकास प्राधिकरण पर 30 हजार का जुर्माना

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मथुरा। विकास की पटकथा लिखने के लिये बनाया गया मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण जनता के शोषण एवं भ्रष्टाचार का प्राधिकरण साबित हो रहा है। जिसमें 30 साल से जमीन की रजिस्ट्री के लिये जूझ रहे उपभोक्ता को राहत देते हुऐ उपभोक्ता फोरम ने विकास प्राधिकरण पर 30 हजार का जुर्माना लगाते हुऐ पीड़ित को जमीन की रजिस्ट्री के आदेश दिये हैं।
‘‘अंधेर नगरी, चौपट राजा’’ की कहावत मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण पर सटीक साबित हो रही है। एक तरफ अधिकारियों की मिली भगत से ताबड़तोड़ अवैद्य निर्माण हो रहे हैं वहीं दूसरी तरफ आम जनता अफसरों की मनमानी से त्राहि-त्राहि कर रही है। इसी तरह का एक मामला उपभोक्ता फोरम में सामने आया है। जहां 30 साल से विकास प्राधिकरण के अफसरों की मनमानी से त्रस्त उपभोक्ता को राहत देते हुए फोरम अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह, सदस्य सूफिया अशरफ ने मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण पर 25 हजार का जुर्माना एवं 5 हजार का वाद व्यय देने तथा जमीन की रजिस्ट्री 45 दिन के अन्दर करने के आदेश दिये हैं।
प्राप्त विवरण के अनुसार अजय सरीन पुत्र स्व. डॉ. जेपी सरीन निवासी 101, नादान महल रोड़ लखनउळ ने मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण की कदम्ब बिहार योजना में एलआईजी भवन संख्या 59 बी की 22 जुलाई 88 की 7 हजार की राशि जमा कर बुकिंग कराई थी। आवटंन शुल्क राशि के रूप में 15 हजार, 3 अगस्त 1988 को जमा कराया गया। जबकि शेष राशि 871 रूपये की मासिक किस्त से 180 किस्तें देना तय की गईं। जबकि इसी भवन से जुड़ी जमीन भी 1991 में आवंटित कर निर्धारित शुल्क वसूल कर मासिक किस्तें निर्धारित कर दी गई। पीड़ित उपभोक्ता समस्त राशि जमा करने के बाद विभागीय अधिकारियों से रजिस्ट्री की मांग करता रहा। लेकिन हर बार कोई ना कोई नया शुल्क निर्धारित कर उपभोक्ता से अफसर राशि जमा कराते रहे। लेकिन बार-बार राशि जमा कराने के बाबजूद भी रजिस्टरी नहीं की गई। इस दौरान विकास प्राधिकरण से लड़ाई लड़ते-लड़ते उपभोक्ता की मौत हो गई। इसके बाद मृतक की पत्नी डॉ० विभा सरीन न्याय पाने के लिये लड़ाई लड़ती रहीं। जिसमें उन्होंने लोकायुक्त लखनउळ में भी शिकायत दर्ज कराई गई। जिसे खारिज कर दिया गया। एक तरफ विकास प्राधिकरण के अफसर भवन से सटी जमीन का आवंटन ठुकराते रहे दूसरी तरफ वह उसी जमीन के बदले विभिन्न मदों में शुल्क जमा कराते रहे और पीड़ित हर बार बकाया राशि जमा करने के बाद जब-जब विव्रळय पत्र जारी करने की मांग करते तब-तब अधिकारी नया शुल्क का नोटिस भेजकर राशि तो जमा करा लेते लेकिन विव्रळय पत्र जारी नहीं करते।
26 मार्च 2012 को 1,18,174 रूपये का नोटिस देने पर उपभोक्ता ने जमा कराकर विव्रळय पत्र के लिये स्टाम्प की खरीद कर ली गई। बल्कि 33 हजार की राशि फिर जमा करा ली गई। इसके बाद आवंटित भवन भूमि को विवादित बताते हुए समिति गठित कर दी गई। विकास प्राधिकरण के अफसरों की मनमानी एवं भ्रष्टाचार से त्रस्त पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम में 8 मई 2013 को परिवाद दर्ज कराया जहां 5 साल से अधिक साल तक लम्बी लड़ाई लड़ने के बाद फोरम अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह, सदस्य सूफिया अशरफ ने विकास प्राधिकरण से पूछा कि जब जमीन आवंटित की पत्रावली विभाग में उपलब्ध नहीं है तो किस आधार पर नोटिस भेजकर राशि जमा कराई गई। आवंटन निरस्त का पत्र क्यों नहीं भेजा गया और आवंटित भवन-भूमि की जमा कराई गई किस्तों को वापिस क्यों नहीं किया गया। प्राधिकरण की दलीलों को ठुकराते हुऐ फोरम ने भवन एवं भूमि का विव्रळय पत्र ;अगर कोई बकाया राशि हो जमाकरद्ध नियमानुसार करने एवं पीड़िता को मानसिक उत्पीड़न के लिये 25 हजार तथा वाद व्यय के रूप में 5 हजार की राशि 45 दिन के अन्दर अदा करने के आदेश मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण को दिये हैं। जबकि जुर्माने की राशि सम्बंधित दोषी विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों से वसूलने का अधिकार भी दिया है।

कार चोरी के बदले बीमा कम्पनी को देने होंगे 2.80 लाख

मथुरा। बीमा कम्पनियों द्वारा मनमानी तरीके से बीमा दावा खारिज किये जाने का सिलसिला जारी है। जिसमें पीड़ित उपभोक्ता बड़ी संख्या में न्याय पाने के लिये उपभोक्ता फोरम की शरण ले रहे हैं। ऐसे ही एक और मामले में पीड़ित उपभोक्ता को राहत देते हुए कार चोरी के मामले में बीमा कम्पनी को करीब 2.80 लाख की राशि ब्याज सहित बीमा कम्पनी को 30 दिन के अन्दर अदा करने के आदेश दिये हैं।
प्राप्त विवरण के अनुसार महेन्द्र सिंह बघेल पुत्र भजनलाल निवासी राजपुर थाना वृन्दावन मथुरा की कार थाना गोविन्द नगर, मथुरा क्षेत्र से चोरी हो गई। जिसकी रिपोर्ट तीन दिन बाद दर्ज हो सकी। पीड़ित ने सर्वेयर को दो चाबी के स्थान पर एक चाबी दी। जिसमें सर्वेयर ने घटना स्थल से कार चोरी नहीं पाया। इस आधार पर उसका बीमा कम्पनी ने दावा खारिज कर दिया। जबकि पुलिस जांच रिपेर्ट में कार चोरी होना पाया और न्यायालय में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम में पुलिस रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किये जिसे फोरम अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह सदस्य सूफिया अशरफ ने स्वीकारते हुए बीमा कम्पनी एलायंज की दलीलों को ठुकराते हुए तथा मनमानी तरीके से बीमा खारिज किये जाने का दोषी मानते हुए पीड़ित उपभोक्ता को कार की बीमित राशि 2,76,893 रूपये, 4 हजार वाद व्यय साधारण ब्याज के साथ 30 दिन के अन्दर बीमा कम्पनी को अदा करने के आदेश दिये हैं।

मरीज का बिल ठुकराया, बीमा कम्पनी को देने होंगे 86 हजार

मथुरा। मेडी क्लेम पॉलिसी के बीमा धारक को इलाज की राशि अदा ना करने पर उपभोक्ता फोरम ने दि ओरियन्टल इंश्योरेंस कम्पनी को मनमानी तरीके से दावा खारिज करने का दोषी मानते हुए पीड़ित उपभोक्ता को 86 हजार से अधिक राशि ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिये हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राजकुमार गुप्ता पुत्र स्व. बिहारीलाल गुप्ता निवासी भरतपुरगेट दरेसी मथुरा ने दि ओरियेन्टल इन्शोरेन्स कम्पनी से परिवार के साथ मेडी क्लेम पॉलिसी ली। इस दौरान राज कुमार गुप्ता की तबियत खराब होने पर परिजनों द्वारा उसे माहेश्वरी हॉस्पीटल मथुरा में इलाज के लिये दाखिल कराया गया। जहां से इसे सर गंगाराम अस्पताल दिल्ली के लिये रेफर कर दिया गया जहां चार दिनों तक वह भर्ती रहे। इस दौरान बीमा कम्पनी को कोरियर द्वारा सूचना दी गई। जबकि बीमा कम्पनी ने मेडीक्लेम का फार्म उपलब्ध ना होने का बहाना करते हुऐ क्लेम की कार्यवाही पूर्ण नहीं की। बाद में क्लेम को यह कहते निरस्त कर दिया गया कि बीमा कम्पनी की शर्तों के विपरीत विलम्ब से दावा किया गया है। फोरम अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह सदस्य सूफिया अशरफ ने पीड़ित उपभोक्ता के प्रस्तुत साक्ष्यों को सही मानते हुए बीमा कम्पनी की सेवा में कमी मानते हुए इलाज पर खर्च हुई 82,717 की राशि 4 हजार वाद व्यय 6 प्रतिशत की साधारण ब्याज के साथ 30 दिन के अन्दर अदा करने के आदेश बीमा कम्पनी को दिये हैं।

मालिक ने दिखाया 3.5 लाख का नुकसान, फोरम ने दिलाये 96 हजार

मथुरा। वाहन दुर्घटना ग्रस्त की मरम्मत राशि में सर्वेयर की रिपोर्ट को सही मानते हुऐ वाहन स्वामी द्वारा मरम्मत के कई गुना बिलों को ना मंजूर करते हुऐ उपभोक्ता फोरम ने 96 हजार की राशि ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिये हैं।
प्राप्त विवरण के अनुसार रामगोपाल सिसौदिया पुत्र भवासीराम निवासी 10 राजीव गांधी नगर एनएच-2 मथुरा का वाहन संख्या यूपी 85 ए.ए. 9201 ताज एक्सप्रेस वे ;यमुना एक्सप्रेस वेद्ध पर नौहझील थानान्तर्गत गांव चांदपुर के निकट टायर फटने से पुलिया से दुर्घटना ग्रस्त हो गया था। जिसका बीमा श्रीराम जनरल इंश्योरेन्स से था। दुर्घटना की सूचना वाहन स्वामी द्वारा बीमा कम्पनी को दी गई। बीमा कम्पनी द्वारा वाहन का सर्वे कराया गया। जिसमें सर्वेयर द्वारा वाहन में नुकसान 85,630 रूपये का आंकलन किया गया। जबकि वाहन स्वामी द्वारा वाहन में हुऐ नुकसान के बिल 3,17,456 प्रस्तुत करते हुऐ 3.50 लाख की राशि की मांग की गई। उपभोक्ता फोरम में सुनवाई के दौरान बीमा कम्पनी द्वारा दलील दी गई कि कम्पनी सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर भुगतान देने को तैयार हैं। फोरम अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह सदस्य सूफिया अशरफ ने वाहन स्वामी द्वारा वाहन में हुऐ नुकसान की किसी अन्य सर्वेयर की रिपोर्ट प्रस्तुत ना करने पर बीमा कम्पनी की दलीलों को स्वीकारते हुए वाहन स्वामी द्वारा प्रस्तुत 3,17,456 की राशि के बिलों को नामंजूर करते हुए बीमा कम्पनी के सर्वेयर की रिपोर्ट को मान्य करते हुए 85,630 रूपये, व्रळेन खर्चा 7,000 तथा वाद व्यय 4 हजार रूपये साधारण व्याज के साथ 30 दिन के अन्दर अदा करने के आदेश दिये हैं।