‘नोटा’ के सोेेेटा ने उड़ाई संघ-भाजपा की नींद

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मथुरा। केन्द्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के एससी/एसटी एक्ट के कानून को रद्द करने के निर्णय को बहाल करने के कारण सवर्ण समाज में पनपे आक्रोश ने भाजपा- आरएसएस के माथे पर चिंता की लकीरें खड़ी कर दी हैं। इसके खिलाफ जहां सोशल मीडिया पर लोकसभा चुनाव में नोटा प्रयोग की गूंज सुनाई दे रही है। वहीं 5 सितम्बर को वृन्दावन में आयोजित विप्र महाकुम्भ के आयोजन को लेकर सरगर्मियां बनी हुई हैं।
हरिजन एक्ट के बढ़ते दुरूपयोग को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसे निरस्त कर दिया था। जिसे केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा पुनः बहाल करने से सवर्ण समाज में आक्रोश का लावा फूट रहा है एवं 2019 के लोकसभा चुनाव में नोटा का प्रयोग करने का आह्नान किया जा रहा है। उ.प्र. के पूर्व प्रमुख सचिव आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने मोदी पर निशाना करते हुए कहा है कि ‘‘हमने मोहब्बत के नशे में जिसे खुदा बना डाला वही कम्बख्त हमारा अपमान करने पर तुला है… विश्वास घात किया है।’’ जिसके कारण सवर्ण समाज ‘नोटा’ का प्रयोग करने का ऐलान कर रहा है। जिससे नोटा सत्याग्रह आन्दोलन जोर पकड़ता दिखाई दे रहा है जिसके कारण नोटा लोकसभा चुनाव में आत्म सम्मान का प्रतीक बनकर उभरेगा।
गोविन्द रघुवंशी विदिशा कहते हैं कि वोट, टैक्स, सवर्णों से लेते हैं जिससे एससी/एसटी को मुफ्त भोजन, आवाज, पढ़ाई, ऋण सभी सुविधाऐं दी जाती हैं इसके बावजूद भी एससी/एसटी एक्ट लागू कर गैर दलितों को फांसी के फन्दे पर चढ़वाने का काम सरकार कर रही है।
मथुरा के विष्णु ठाकुर कहते हैं कि जब राष्ट्रपति या देश की सुरक्षा का सवाल आता है तो राजपूत-जाट को ही सेना में भर्ती किया जाता है। दलितों को क्यों नहीं। ठा. सुभाष चन्द चौहान कहते हैं कि ‘‘सवर्णों ने जिसको दूध पिलाया, वो तो सांप निकला, ये तो वीपी सिंह का भी बाप निकला’’ जैसे तीखे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। इसी तरह अन्य सवर्ण भी एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ तीखी टिप्पणियां कर रहे हैं। जबकि 5 सितम्बर को वृन्दावन स्थित प्रियकान्तजू मन्दिर के सामने भागवताचार्य देवकी नन्दन ठाकुर जो 2014 में भाजपा के साथ तन-मन-धन से खड़े थे अब एससी/एसटी के खिलाफ विप्र महाकुम्भ का आयोजन कर रहे हैं। जिसमें एक लाख से अधिक लोगों के आने का दावा किया जा रहा है। एक तरफ सवर्ण मोदी सरकार के खिलाफ नोटा एवं विरोध का बिगुल फूंक रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ मोदी समर्थक इसे विरोधियों की साजिश करार दे रहे हैं। लेकिन सवर्णों के ‘‘नोटा’’ के सोटा से भाजपा एवं संघ हाईकमान चिन्तित- परेशान नजर आ रहा है। जिससे निपटने के लिये नई रणनीतियों को अन्जाम दिया जा रहा है।