फिरोजाबाद में आवेदन, मथुरा में हो गया छात्र का दाखिला

0
84

मथुरा/फिरोजाबाद। ‘‘रस्सी को सांप, सांप को रस्सी’’ बनाने में पुलिस भले ही बदनाम हो लेकिन शिक्षा माफिया और समाज कल्याण विभाग के अफसरों का गठजोड़ नये-नये गुल खिलाने में लगा है। जिसमें एक दलित छात्र ने बीएड में दाखिला का आवेदन तो फिरोजाबाद के कॉलेज में किया। लेकिन उसका दाखिला मथुरा में बीटीसी में दर्शाकर 43 हजार से अधिक की छात्रवृत्ति को बैंक में खाता खुलवाकर फर्जी तरीके से निकाल कर हड़प कर लिया गया। पीड़ित छात्र ने कॉलेज एवं बैंक प्रबंधकों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकद्मा दर्ज कराने की गुहार न्यायालय से लगाई है।
दलित एवं पिछडे़ वर्ग के छात्र-छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा एवं छात्रवृत्ति देने की योजना सरकार द्वारा संचालित की जा रही है। जिसमें समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों एवं शिक्षा माफियाओं का गठजोड़ फर्जी वाड़ा कर जहां छात्रवृत्ति को हड़प करने में लगा है वहीं बच्चों का भविष्य बर्बाद करने में लगे हुए हैं। इसी तरह की घटना प्रताप िंसह पुत्र स्व. भोलेराम निवासी गौतम नगर हिमायूंपुर थाना दक्षिण फिरोजाबाद के पुत्र उमेश कुमार के साथ हुई जिसने सत्र 2017-19 के लिये बीएड में बीएस मुखिया महाविद्यालय बसई मौहम्मदपुर फिरोजाबाद में अनुसूचित जाति के छात्र के रूप में आवेदन किया। जिसमें विद्यालय प्रबंधक ने आवश्यक कागजातों के साथ सादा कागज पर हस्ताक्षर, फोटो आदि लेकर कहा कि तुमसे ऑनलाइन पंजीकरण में गलती हो सकती है इसलिये स्वयं ही वह पंजीकरण कर देंगे। साथ ही फीस छात्रवृत्ति से लेने की कहकर घर भेज दिया। जब छात्र अप्रेल 2018 में छात्रवृत्ति के सम्बंध में प्राचार्य से मिला तो कॉलेज प्राचार्य ने बीएड में दाखिला ना होने की जानकारी देते हुए बताया कि उसका दाखिला बीटीसी विमला देवी कॉलेज सौंख मथुरा में बीटीसी में करा दिया है।
कॉलेज प्राचार्य द्वारा बीएड की जगह बीटीसी में दूसरे जनपद में दाखिले पर आपत्ति व्यक्त की तो कॉलेज प्रबंधक एवं प्राचार्य ने जाति सूचक शब्दों का प्रयोक करते हुए गाली-गलौज की। इसके बाद पीड़ित छात्र को जन सेवा केन्द्र के
माध्यम से जानकारी हुई कि उसके नाम पर फर्जी फोटो लगाकर यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया नैनू पट्टी बैंक मथुरा में खाता खोलकर छात्रवृत्ति के रूप में 2400 एवं 41 हजार की राशि भी बैंक से निकाल ली गई पीड़ित छात्र के पिता प्रताप सिंह का कहना है कि उसके पुत्र उमेश कुमार द्वारा बीटीसी विमला देवी कॉलेज सौंख मथुरा में ना तो कभी बीटीसी के लिये आवेदन किया और न ही बैंक में कोई खाता खोला गया। इसके बावजूद भी विद्यालय प्रबंधकों ने गठजोड़ कर छात्रवृत्ति एवं छात्रवृत्ति शुल्क की राशि हड़प कर ली। जिसमें समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत है। पीड़ित के पिता ने दोषियों के खिलाफ मुकद्मा दर्ज कराने के लिये वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा को शिकायती पत्र दिया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इस पर पीड़ित ने सीजीएम न्यायालय मथुरा में दोषियों के खिलाफ 156(3) में मुकद्मा दर्ज कराने के लिये याचिका दायर की है। जिसमें न्यायालय ने जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा को तलब किया है।

फर्जी शिक्षा भर्ती घोटाले में फंसी विद्यालय की प्रबंध समिति भंग

आगरा/मथुरा। फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले में फंसी सूरस्मारक मण्डल आगरा प्रबंध समिति को उपनिम्बधक आगरा ने भंग करते हुए प्रशासन को चुनाव होने तक संस्था के तीनों विद्यालयों में वैकल्पिक व्यवस्था करने के आदेश अधिकारियों को दिये हैं।
सूर स्मारक मण्डल आगरा की प्रबंध समिति द्वारा बृजरानी मैमोरियल महाविद्यालय सूरकूटी रूनकता आगरा, महाकवि सूरदास सूर स्मारक जू. हाई. रूनकता आगरा, श्री हरिदास खिमजी सूरदास पूर्व. मा. वि. परासौली गोवर्धन मथुरा संचालित किये जाते हैं। जिसमें प्रबंध समिति पर फर्जी तरीके से सूरबाल विद्या मन्दिर परासौली में छात्र संख्या दर्शाकर अनुदान सूची में शामिल कराकर फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति का आरोप है। जिसे लेकर प्रबंध समिति में विवाद उत्पन्न होने पर एसडीएम आगरा ने वर्तमान प्रबंध समिति को अवैध मानते हुऐ चुनाव कराये जाने के आदेश पारित किये। जिस पर उपनिम्बधक आगरा ने प्रबंधतं समिति को भंग करते हुए कुल सचिव बीआर अम्बेडकर आगरा, जिलाविद्यालय निरीक्षक आगरा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आगरा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मथुरा को अग्रिम चुनाव होने तक तीनों विद्यालयों में वैकल्पिक व्यवस्था के आदेश दिये हैं। लेकिन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मथुरा द्वारा अभी तक इस सम्बंध में कार्यवाही नहीं की गई है।

शिक्षा माफियाओं पर मेहरबान अफसर

मथुरा। समाजवादी पार्टी शिक्षक महासभा के जिलाध्यक्ष प. रासबिहारी उपाध्याय ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर शिक्षा माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए उच्च अधिकारियों से कार्यवाही की मांग की है।
श्री उपाध्याय का कहना है कि उन्होंने जनपद में अवैध रूप से संचालित 56 विद्यालयों की सूची जिला विद्यालय निरीक्षक को कार्यवाही के लिये दी थी। लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसके सम्बंध में जनवरी 2018 में आरटीआई के माध्यम से भी कार्यवाही सम्बंध में जवाब मांगा गया लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं दिया। कार्यवाही को लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक से कई बार वार्ता की कोशिश की गई। लेकिन उन्होंने कभी मुलाकात का मौका नहीं दिया। जबकि उन्हें बंद कमरे में शिक्षा माफियाओं के साथ हर समय वार्ता में व्यस्त होते देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के अफसरों की सांठ-गांठ से फर्जी विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। जिससे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।