डॉ अशोक होंगे महागठबंधन प्रत्याशी ?

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मथुरा। लोकसभा चुनाव में अभी भले ही 6 माह करीब का समय हो लेकिन राजनैतिक दलों ने चुनावी चौसर बिछाना शुरू कर दिया है। जिसमें भाजपा द्वारा योजनाओं का पिटारा खोलना शुरू कर दिया है तो वहीं विपक्षी दलों ने भी चुनावी रणनीति को अंजाम देना शुरू कर दिया है। भाजपा को 2019 में कड़ी टक्कर देने के लिये महागठबंधन की संभावनाओं के चलते यहां विपक्षी दलों में टिकट पाने की होड़ मची है। वहीं रालोद पहली बार वैश्य प्रत्याशी के रूप में डा. असोक अग्रवाल को मैदान में उतारकर भाजपा के वोट बैंक माने जाने वाले वैश्य समाज में सैंध लगाकर चुनावी हवा का रूख बदल सकता है।
लोकसभा चुनाव 2019 की वैतरणी पार करने के लिये जहां भाजपा की केन्द्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा विकास योजनाओं का ताबड़तोड़ शिलान्यास का पिटारा खोला जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों द्वारा केन्द्र एवं उ.प्र. सरकारों के खिलाफ आन्दोलनों का बिगुल फूंका जा रहा है। उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संसदीय क्षेत्र गोरखपुर, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर एवं कैराना क्षेत्र के लोकसभा उप चुनाव में केन्द्र एवं उ.प्र. में सरकार होने के बावजूद भी भाजपा की हार से विपक्ष में उत्साह दिखाई दे रहा है। कहने को तो विपक्ष के पास खोने के लिये कुछ खास नहीं है लेकिन पाने की ललक उनके अन्दर साफ देखी जा सकती है। तीनों प्रमुख संसदीय सीटों पर सफलता के बाद उ.प्र. में सपा-बसपा-रालोद का गठजोड़ गहरा हुआ है तो कांग्रेस अलग-थलग नजर आ रही है। बसपा के पास वर्तमान में मात्र मांट विधान सभा क्षेत्र के विधायक श्याम सुंदर शर्मा हैं जो एक बार बसपा तो एक बार लोकतांत्रिक कांग्रेस से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन दोनों ही बार उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। जबकि रामलहर हो या भाजपा लहर वह मांट विधान चुनाव में लगातार विरोधियों को मात देकर 8 बार विधान सभा पहुंचने में सफल रहे हैं। सपा के पास कोई मजबूत प्रत्याशी नहीं हैं। जबकि मथुरा रालोद का मजबूत वोट बैंक के रूप में जाना जाता है। जहां 2009 में जयंत चौधरी ने लोकसभा चुनाव भाजपा के सहयोग से जीतकर अपना परचम फहराया था। जबकि विधान सभा की पांच सीटों से तीन पर रालोद का कब्जा भी होता रहा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि महागठबंधन के चलते मथुरा लोकसभा सीट पर रालोद की दावेदारी मजबूत होने के कारण जयंत चौधरी द्वारा पार्टी कार्यकार्ताओं को चुनाव की तैयारियों में जुट जाने के निर्देश दिये गये हैं। बल्कि मथुरा जनपद के वह लगातार दौरे भी कर रहे हैं। रालोद से जुड़े सूत्र बताते हैं कि जयंत चौधरी 2019 में बागपत संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। तो वहीं मथुरा संसदीय सीट पर किसी मजबूत प्रत्याशी को उतार सकते हैं। जिसमें रालोद जिलाध्यक्ष कु. नरेन्द्र सिंह सहित आधा दर्जन प्रमुख नेता दावेदारी जता रहे हैं।
रालोद सूत्रों की मानें तो कु. नरेन्द्र सिंह की पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा खिलाफत की जा रही है। जबकि डा.असोक अग्रवाल को लोकसभा चुनाव लड़ाये जाने की पैरवी की जा री है। जिनके समर्थन में कई वरिष्ठ नेता भी खुलकर खड़े हो गये हैं। बताते हैं कि 2009 के लोकसभा चुनाव में डा. असोक अग्रवाल का तन-मन-धन से सहयोग किया था। बल्कि बृजवासी परिवार से जयंत चौधरी के रिश्तेदारों के नजदीकी रिश्ते होने के कारण 2017 में सपा से टिकट कटने के बाद तत्काल डा. असोक अग्रवाल को मथुरा-वृन्दावन विधान सभा सीट से प्रत्याशी घोषित कर चुनाव लड़ाया गया था। जिसमें हार होने के बाद डा. अग्रवाल ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसे जयंत चौधरी ने अस्वीकार करते हुए पद पर बने रहने का आदेश दिया। बल्कि उन्हें हाथरस लोकसभा प्रभारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। रालोद सूत्रों का कहना है कि पार्टी में जातीय संतुलन बनाने की दृष्टि एवं पूर्व में वैश्य समाज द्वारा रालोद के साथ चुनाव में वोट देने को देखते हुए इस बार के चुनाव में डा. अशोक अग्रवाल को लोकसभा प्रत्याशी बनाये जाने की चर्चाएं काफी मजबूत होती जा रही हैं। बताते हैं कि पिछले दिनों जयंत चौधरी ने डा. असोक अग्रवाल के आवास पर काफी देर तक डा. असोक के साथ गुफ्तगू की। बल्कि बिजली विभाग के खिलाफ हल्लाबोल आन्दोलन का नेतृत्व भी डा. अग्रवाल के हाथों में दिया गया। जिसके चलते जिलाध्यक्ष कु. नरेन्द्र सिंह ने देहात के बिजली घर पर चन्द लोगों के साथ प्रदर्शन किया। जबकि डा. असोक अग्रवाल के साथ कैंट बिजली घर पर रालोद के सभी वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।
गुटबाजी में बंटा रालोद लोकसभा चुनाव में क्या गुल खिलायेगा ये तो वक्त तय करेगा। लेकिन जिस तरह डा. असोक अग्रवाल के साथ रालोद नेता खड़े नजर आ रहे हैं उससे उनकी स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है। महागठबंधन से रालोद प्रत्याशी का उतरना मानकर अन्य राजनैतिक पार्टी के नेता भी अपनी जुगत भिड़ाने में लगे हुए हैं। इस सम्बंध में ‘‘विषबाण’’ से बातचीत में डा. असोक अग्रवाल ने कहा कि वह लोकसभा चुनाव लड़ने की कोई दावेदारी नहीं कर रहे हैं। अगर पार्टी ने मुझे लोकसभा चुनाव लड़ने के निर्देश दिये तो वह उसका पालन करते हुए जनता की सेवा करने के लिये हर समय तत्पर रहेंगे। इस सम्बंध में ‘‘विषबाण’’ द्वारा जयंत चौधरी से भी सम्पर्क का प्रयास किया गया लेकिन वार्ता नहीं हो सकी।