गरीबों के निवाले पर अफसर-माफियाओं का डाका

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मथुरा। गरीबों एवं आम जनता के लिये सरकार द्वारा चलाई जा रही खाद्यान्न योजना अफसरों-राशन माफियाओं के लिये कुबेर का खजाना साबित हो रही हैं। कहीं छापामार कार्रवाई के नाम पर अफसर लाखों की वसूली कर रहे हैं तो कहीं पकड़े गये कालाबाजारी के राशन को माफियाओं के इशारे पर लावारिस साबित करने का खुला खेल खूब खेला जा रहा है। जबकि आपूर्ति गोदामों से माल उठाने के बदले राशन विक्रेताओं से मनमानी वसूली की जा रही है।
‘‘ना गुण्डा राज, ना भ्रष्टाचार’’ के नारे के साथ केन्द्र एवं उ.प्र. में पूर्ण बहुमत से आई भाजपा सरकारों के शासन में गरीबों की खाद्यान्न योजना एवं केरोसिन में ये नारा हवा-हवाई साबित हो रहा है। मात्र 2 रूपये गेंहूँ एवं 3 रूपये किलो की दर पर सरकार द्वारा उपलब्ध कराये जाने वाला चावल गरीबों के लिये निवाला कम अफसरों-माफियाओं के गठजोड़ के लिये कुबेर का खजाना अधिक साबित हो रहा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि मात्र 2-3 रूपये की दर पर उपलब्ध कराये जाने वाले गेंहूं-चावल को राशन विक्रेता जनता के वितरण करने के स्थान पर 1500 से 1800 रूपये प्रति कुंतल की दर पर राशन माफियाओं को बेच रहे हैं। जिन्हें माफिया ट्रकों में भरकर दिल्ली की आटा मिलों में ऊँची कीमतों पर बेचकर मालामाल हो रहे हैं। बताते हैं कि पिछले दिनों राया थाना क्षेत्र में दो ट्रक राशन के पकड़े गये थे। जिन्हें माफियाओं से सांठ-गांठ कर उन्हें यह कहकर छोड़ दिया गया कि यह राशन सरकारी नहीं है। इसी प्रकार मांट थाना क्षेत्र में एक ट्रक राशन पकड़ा गया। जिसे भी छोड़ दिया गया।
एसडीएम मांट राजेन्द्र पेसियां द्वारा नौहझील क्षेत्र के गांव रायपुर के डीलर लक्ष्मीचन्द के आवास पर छापा मारकर करीब 1200 बोरा गेंहूँ-चावल पकड़ने के बाद कमरों पर ताला डाल दिया गया था। बताते हैं कि इस मामले में करीब 7 लाख का लेन-देन कर पर्दा डालकर राशन को ऊँची कीमत पर बेच दिया गया। जब इस सम्बंध में एसडीएम मांट राजेन्द्र पेसियां से ‘‘विषबाण’’ द्वारा वार्ता की गई तो उन्होंने कहा कि डीलर द्वारा अपना रजिस्टर-रिकॉर्ड दिखाया गया तो वह सही पाया गया। जबकि नौहझील ब्लॉक की पूर्ति निरीक्षक पारूल शर्मा के निजी चालक द्वारा राशन डीलर से 40 हजार की ऑडियो वायरल होने एवं जिलाधिकारी मथुरा से शिकायत होने के बाद दोषी पूर्ति निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने के स्थान पर पारूल शर्मा को ही जांच दे दी गई।
जिसपर पारूल शर्मा एवं एसडीएम मांट द्वारा रिश्वत का ऑडियो बनाने, उसे वायरल करने, जिलाधिकारी से शिकायत करने वाले डीलर एशोसियेशन के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह की पत्नी मीनाक्षी देवी, चांदपुर कलां के भरत सिंह शर्मा, अहमदपुर के प्रवीन कुमार की दुकानों को बिना किसी शिकवा-शिकायत के छापा मारकर निलम्बित कर दिया गया। जिसे लेकर सैकड़ों ग्रामीणों-महिलाओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए डीएसओ-आपूर्ति निरीक्षक को भ्रष्ट बताते हुए कार्रवाई कर दुकानों को बहाल करने की मांग की गई। जिसमें दुकानों को बहाल करने का आश्वासन उच्च अधिकारियों द्वारा दिये जाने पर ग्रामीण वापिस लौट सके थे।
पुष्पेंद्र सिंह उर्फ विजय पाल सिंह का कहना है कि पूर्ति निरीक्षक पारूल शर्मा द्वारा उनसे 2 लाख की मांग की गई। जिसे पूरा ना करने पर दुकान को निलंबित किया गया। जबकि इससे पूर्व उनसे थाना हाइवे के समीप पारूल शर्मा द्वारा 20 हजार की वसूली की गई थी। पूर्ति निरीक्षक की अवैध वसूली से त्रस्त होकर राशन विक्रेताओं द्वारा ऑडियो बनाई गई थी। इसके बावजूद भी उसे निलम्बित ना कर जिलापूर्ति अधिकारी कार्यालय में तैनात कर दिया गया। कई राशन विक्रेताओं ने नाम ना खोलने की शर्त पर बताया कि अवैध वसूली के चलते नावली डीलर के यहां छापा मारा गया है। जहां बरामद माल पर ताला डालकर सौदेबाजी का खेल चल रहा है। इसी तरह नौहझील, कौलाहर, हरनौल, नशीटी, मौजी का नगरा आदि दुकानों पर भी छापेमारी की गई है। इसके अलावा चौमुहां, छाता, बल्देव, नन्दगांव, फरह, महावन, शेरगढ़ आदि क्षेत्रों में भी राशन कालाबाजारी की शिकायतों को लेकर आये दिन ग्रामीण तहसील, जिला मुख्यालय पर शिकायत-प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन अधिकारी जांच पर जांच के आदेश देकर अपनी जेबें भरने में लगे हुए हैं।

पग-पग पर होती है राशन विक्रेताओं से अवैध वसूली

मथुरा। ‘‘राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट’’ की पंक्तियां गरीबों के राशन पर सटीक साबित हो रही हैं। जहां अधिकारी-कर्मचारी पग-पग पर राशन विक्रेताओं को लूट रहे हैं तो राशन विक्रेता गरीबों के निवाले को कालाबाजारी करने में लगे हुए हैं।
गरीबों के राशन में किस तरह लूट मची हुई है इसका खुलासा ‘‘विषबाण’’ टीम की कई दिनों की जांच पड़ताल में हुआ। जिसमें राशन विक्रेताओं ने बताया कि क्षेत्रीय एसएमआई गोदामों से राशन उठाने के बदले अधिकारी 25 से लेकर 40 रूपये प्रति कुंतल की दर से अवैध वसूली करते हैं। 101 किलो की भर्ती में 100 किलो मय बोरा देते हैं। जब बोरों की तोल चैक की जाती है तो उसमें 3 से 5 किलो तक गेंहूं-चावल कम निकलते हैं। जिसकी शिकायत करने पर दुकान को बर्खास्त करने की धमकी दी जाती है। इसके बाद राशन वितरण कराने वाले पर्यवेक्षक को 500 से दो हजार तक की राशि प्रति माह देनी पड़ती है। आपूर्ति कार्यालय से माल उठाने से पूर्व प्रमाण पत्र के नाम पर 1500 रूपये वसूल किये जाते हैं। जबकि कैरोसिन पर एक रूपये प्रति लीटर की दर से सुविधा शुल्क वसूला जाता है। वहीं डिपो संचालक मशीन से नाप करने के स्थान पर मीटर से केरोसीन नाप कर देते हैं जिसमें 200 लीटर के ड्रम में 180 से 185 लीटर ही केरोसिन मिलता है। जिसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से किये जाने के बावजूद भी डिपो संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई आज तक नहीं की गई है। जिससे डिपो मालिक अरबों की सम्पत्ति के मालिक बन गये हैं।
राशन विक्रेताओं का कहना है कि ग्राम प्रधान अलग से प्रतिमाह सुविधा शुल्क के साथ मुफ्त में घर का पूरा राशन अलग से लेता है। जबकि दबंग किस्म के लोग भी फ्री में राशन ले जाते हैं। राशन डीलर कहते हैं कि जब भी कोई प्रशासनिक, राजनैतिक, धार्मिक या स्थानीय कार्यक्रम होता है सबसे पहले उनसे ही वसूली की जाती है। इसके बावजूद भी जब कोई दबंग शिकायत कर देता है तो प्रशासनिक अधिकारी 50 हजार से लेकर 1 लाख तक वसूली कर लेता है। जिसे ना देने पर झूठे मुकद्मे दर्ज करा दिये जाते हैं। जबकि निलम्बित दुकान को बहाल करने, अटैच करने या फिर नई दुकान आवंटित करने के नाम पर 50 हजार से लेकर दो लाख तक ;राशन की मात्रा के आधार परद्ध अधिकारी अवैध वसूली करते हैं। इसके चलते राशन विक्रेता राशन सामिग्री की कालाबाजारी करने पर मजबूर हो जाते हैं। राशन विक्रेताओं की मानें तो इस खेल में उच्च अधिकारी से लेकर राजनेता तक शामिल हैं। लेकिन राशन कालाबाजारी की गाज केवल विक्रेताओं पर सबसे पहले गिरती है जिससे विक्रेता हर समय दहशत में रहते हैं।

राशन माफिया बने पैट्रोल पम्प, शोरूम, कोठियों के मालिक

मथुरा। ‘‘दामोदर बैठे रहें, दाम करें सब काम’’ की कहावत गरीबों के राशन पर सटीक साबित हो रही है। जहां गरीबों के राशन से अनेक माफिया-अफसर करोड़ों-अरबों की सम्पत्ति के मालिक हो गये हैं। जिसमें कोई पैट्रोल पम्प तो कोई आलीशान कोठियों-शोरूमों का मालिक बन एश-ओ-आराम की जिन्दगी गुजार रहा है।
‘‘विषबाण’’ टीम की जांच पड़ताल में सामने आया कि गरीबों के निवाले की खरीद-फरोख्त करने वाले राशन माफिया नौहझील क्षेत्र में आलीशान शोरूम, पैट्रोल पम्प, कोठी, गाड़ी, चावल-आटा मिल के मालिक बन चुके हैं। जबकि चन्द वर्ष पूर्व तक उनके पास बाइक तक उपलब्ध नहीं थी। इसी तरह मांट क्षेत्र का एक राशन माफिया मथुरा शहर की पॉश कॉलोनी में कई करोड़ की आलीशान कोठी तथा कई गाड़ियों का मालिक है। इसी तरह केरोसीन डिपो का संचालन करने वाला एक राजनैतिक पार्टी से विधान सभा टिकट का दावेदार है। छाता क्षेत्र के एक राशन डीलर ने पिछले दिनों पुत्री की भव्य रूप से कृष्णा नगर के प्रमुख मैरिज होम में शादी की। जिसमें मंत्री से लेकर अफसरों तक ने भाग लिया। बल्कि पुत्री को दहेज में 11 लाख कीमत की गाड़ी भेंट की जबकि 15 लाख से अधिक की नगदी वर पक्ष को दी गई। इसी तरह एक अन्य डिपो संचालक अरबों की सम्पत्ति, पेट्रोल पम्प आदि का मालिक बन गया है। जानकार सूत्र बताते हैं कि गरीबों के लिये आने वाले केरोसीन को डिपो संचालक ऊँची कीमत पर पैट्रोल पम्पों को सप्लाई कर देते हैं या फिर सड़क निर्माण में होने वाले काले तेल में उसका प्रयोग कर दिया जाता है। जिससे प्रतिमाह लाखों-करोड़ों की कमाई हो जाती है। जबकि डिपो संचालक राशन विक्रेताओं से एक हजार से दो हजार के मामूली मुनाफे पर 200 लीटर का केरोसीन का ड्रम खरीदते हैं। जिससे गरीबों के निवाले से राशन विव्रळेता कम माफिया-अफसर अधिक मालामाल हो रहे हैं।

कमीशन बढ़ा पर नहीं थमीं काला बाजारी

मथुरा। शासन द्वारा राशन कालाबाजारी को रोकने के लिये राशन विक्रेताओं का कमीशन बढ़ाने के बाबजूद भी राशन कालाबाजारी का खेल थमता नजर नहीं आ रहा है।
पूर्व में सरकार द्वारा राशन विक्रेताओं को गेहूँ-चावल पर मात्र 6 पेसे प्रति किलो, तथा केरोसीन पर भी 6 पैसे प्रति लीटर का कमीशन दिया जाता था। जिसके कारण राशन विक्रेताओं को मेहनत-मजदूरी मिलना तो दूर भाड़ा भी जेब से देना पड़ता था। जिसे देखते हुए सरकार द्वारा गेहूँ-चावल के कमीशन को बढ़ाकर 80 पैसे प्रति किलो कर दिया गया। जबकि कैरोसीन की दरें तो कई गुना बढ़ाकर 25 रुपये लीटर तक कर दी गईं। जिससे डीलरों की लागत तो बढ़ गई लेकिन कमीशन में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई। इसके बाबजूद भी ना तो राशन कालाबाजारी पर रोक लग सकी और ना ही गरीबों को समुचित निवाला मिल पा रहा है। जबकि सरकार द्वारा चीनी वितरण को बन्द कर दिया गया है।

काला बाजारी के राशन को छोड़ने के बदले ऐसे होता है खेल

मथुरा। काला बाजारी के राशन को ग्रामीणों द्वारा रंगे हाथ पकड़वाने के बावजूद भी अफसरों की कारस्तानी से राशन विक्रेता साफ बच निकलते हैं और जनता हाथ मलते रह जाती है।
आये दिन ग्रामीणें द्वारा कालाबाजारी को जाते राशन को पुलिस, आपूर्ति विभाग, प्रशासनिक अधिकारियों को रंगे हाथ पकड़वा दिया जाता है। जिसमें पकड़े हुऐ राशन को अधिकारी जांच-पड़ताल के नाम पर राशन विक्रेता को दुकान तथा रिकॉर्ड को पूरा करने का समय देते हैं। जिसमें क्षेत्रीय राशन माफिया या दूसरा राशन डीलर माल को पूरा करने में मदद करते हैं। जैसे ही दुकान का माल और रिकॉर्ड पूरा हो जाता है वैसे ही अधिकारी शिकायत कर्ताओं की उपस्थिति में दुकान का निरीक्षक करते हैं। जहां स्टॉक पूरा मिलने पर अधिकारी शिकायत कर्ताओं को कानूनी कार्यवाही का भय दिखाकर खामोश रहने पर मजबूर कर देते हैं। जबकि पकड़े गये माल को या तो लावारिस दर्शाते हैं या फिर किसी व्यापारी का दर्शाकर उसके हवाले कर मोटा खेल करने में सफल हो जाते हैं। जिसके कारण राशन कालाबाजारी का खेल बदस्तूर चलता रहता है।