शिक्षक लापता, मासूम लगा रहे झाड़ू, विद्यालयों में भरा भूसा-ईंधन

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मथुरा। ‘‘सब पढ़ें-सब बढ़ें’’ नारे के साथ चलाया जा रहा सर्व शिक्षा अभियान जनपद में किस तरह शिक्षकों एवं अफसरों के लिये वरदान बन रहा है इसका नजारा विद्यालयों की हालत से देखा जा सकता है। जहां किसी विद्यालय में भूसा, उपले भरे जा रहे हैं तो कहीं उन्हें मैरिज होम बना दिया गया है। शिक्षक विद्यालयों पर ताला डालकर सालों से कागज में उपस्थिति दर्ज कर घर बैठे लाखों-करोड़ों का वेतन लेकर अन्य कारोबारों को अंजाम दे रहे हैं। सब कुछ जानते हुऐ अफसर मौन धारण किये हुऐ हैं।

फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले के लिये कुख्यात हो चुके मथुरा जनपद में सर्व शिक्षा अभियान की हालत किस तरह बदतर हो चुकी है इसका खुलासा ‘विषबाण’ टीम द्वारा विद्यालयों की हालत की जांच में हुआ है। फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले में फंसे पूर्व माध्यमिक विद्यालय भगवानगढ़ी ब्लाक नौहझील के प्रधानाध्यापक वेगराज सिंह चाहर के विद्यालय में पिछले कई सालों से अध्यापक विद्यालय से लापता चल रहे हैं। लेकिन रजिस्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर वेतन ले रहे थे जबकि रिकॉर्ड में बच्चे मिड डे मील को रोज खा रहे थे। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला मामला तो यह था कि जिन कक्षों में बच्चों को पढ़ना था वहां कमरों में भूसा-उपले, कबाड़ा भरा हुआ था।
बल्कि दरवाजों पर जंग लग चुकी थी। ग्रामीणों ने शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण सरकारी विद्यालयों को दावतघर के रूप में तब्दील कर वहां दावत का मजा लिया जा रहा था।

इसी तरह प्राईमरी विद्यालय लालगढ़ी ब्लाक मांट में शिक्षक ललित वर्मा मासूम बच्चों से विद्यालय में झाडू लगवा रहे थे। यहां चौकाने वाला तथ्य देखने को मिला, विद्यालय में दो अध्यापक एक शिक्षा मित्र जिनका मासिक वेतन ही 1.30 लाख करीब मिलता है वहां मात्र आधा दर्जन बच्चे ही उपस्थित थे। जब कि इसी परिसर में संचालित पूर्व मा. विद्यालय में तो अध्यापकों के साथ-साथ बच्चे भी लापता थे। जबकि मिड डे मील कागजों में बच्चों द्वारा खूब खाया जा रहा था। विद्यालयों में सेवक के रूप में विक्रम सिंह सरकारी रिकॉर्ड को पूरा करने में लगे थे। इस विद्यालय के कक्षों में पशुओं का चारा, टूटा फर्नीचर भरा हुआ था तो शौचालय में ईंट-पत्थर पड़े हुऐ थे।
प्रधानाध्यापक की कुर्सी गुरूजी का इंतजार कर रही थी। इस सम्बंध में कराहरी न्याय पंचायत के एनपीआरसी अमीचन्द से सम्पर्क किया तो उन्होंने कहा कि कोई भी शिक्षक अवकाश पर नहीं है। जब शिक्षकों की अनुपस्थिति के बारे में कहा तो फोन काटते हुऐ कहा कि वह फिर बात करते हैं।
इसी तरह प्राथमिक विद्यालय नगला भूपसिंह विकास खण्ड मांट पर कार्यरत प्रधानाध्यापक रामबाबू सिंह विद्यालय से नदारद थे। जबकि रजिस्टर में उनकी उपस्थिति दर्ज थी। जब सहायक अध्यापक से जानकारी की तो बताया कि विद्यालय आकर वह एक शोक संवेदना में चले गये हैं। इसी तरह नौहझील ब्लाक के दूर-दराज स्थानों के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षकाऐं बड़ी संख्या में अनुपस्थित रहकर घर बैठे वेतन प्राप्त कर रही हैं। इस सम्बंध में ‘विषबाण’ द्वारा बीएसए चन्दशेखर सिंह से कार्यालय में मुलाकात कर सवाल पर सवाल दागे गये तो वह बाद में वार्ता करने का बहाना कर बार-बार टालते रहे।

 

विद्यालय के खरंजे को खा गए प्रधान-अफसर

मथुरा। सर्व शिक्षा अभियान शिक्षकों के साथ-साथ ग्राम पंचायतों के लिये भी वरदान साबित हो रहा है। जिसमें विद्यालयों में पेवर के लिये मिली धनराशि को ग्राम प्रधान-सचिव मिलकर हड़प कर गये। बल्कि पुरानी बाउंड्रीबाल की ईंटों को लगाकर नई दर्शा दी गई।
सर्व शिक्षा अभियान शिक्षक अफसरों के साथ-साथ ग्राम पंचायतों के लिये भी किस तरह वरदान साबित हो रहा है इसका खुलासा प्राथमिक विद्यालय सिर्रेला ब्लाक मांट की बाउड्रीवाल, कमरों में टाइल्स एवं विद्यालय प्रांगण में पेवर हेतु सरकार द्वारा धनराशि अवमुक्त कर दी गई। जिसमें विद्यालय की पुरानी बाउड्रीवाल को तोड़कर 7 फुट की निर्माण करा दी गई। जिसमें पुरानी ईंटों का प्रयोग किया गया। जबकि विद्यालय प्रांगण में होने वाले पेवर कार्य का निर्माण दर्शाकर खाते से पूरी धनराशि निकाल ली गई। विद्यालय के प्रधानाध्यापक का कहना है कि ग्राम पंचायत द्वारा 8 माह पूर्व ही पेवर कार्य की राशि खाते से निकाल ली गई है। जबकि आज तक पेवर कार्य शुरू नहीं कराया गया है। जिसमें लाखों की राशि को हड़प कर लिया गया है। ग्राम प्रधान पूरन सिंह ने ‘‘विषबाण’’ से कहा कि पेवर कार्य के निर्माण पर सीडीओ द्वारा रोक लगा देने के कारण कार्य नहीं हो सकता है। जबकि दूसरी ओर बताया जाता है कि पेवर कार्य से रोक हटने के बाद भी कार्य नहीं कराया गया है।