यूपी में एक और शिक्षक भर्ती घोटाला, विद्यालय न छात्र फिर भी हो गई शिक्षकों की भर्ती

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आयराखेड़ा स्थित विद्यालय जहाँ बच्चों-शिक्षकों की जगह रहते हैं पशु लेकिन प्रबंधतंत्र ने 500 करीब बच्चे दर्शाते हुए 15 शिक्षकों की तैनाती दर्शाई है। -फोटो विषबाण

मथुरा। फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले से अभी पूरा पर्दा उठ भी नहीं पाया है कि सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के नाम पर अनुदानित जूनियर विद्यालयों के प्रबंधतंत्रों ने शिक्षा विभाग के अफसरों की सांठ-गांठ से पूरे प्रदेश में 116 प्राइमरी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या में बढ़ोत्तरी दर्शाकर 15 से 25 लाख का लेनदेन कर पुराने शिक्षकों को हटाकर अंगूठा टेक से लेकर कागजी डिग्री धारियों को अध्यापकों की भर्ती किये जाने का बड़ा घोटाला उजागर होकर सामने आ रहा है। जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री से लेकर हाईाकोर्ट तक पहुंच गई। जिसमें जांच के नाम पर शिक्षा विभाग के अफसर लीपापोती के खेल में जुटे हुए हैं।
मथुरा सहित पूरे उ.प्र. में फर्जी शिक्षक भर्ती का खेल उजागर होने के बाद अब अनुदानित विद्यालयों में भी बड़े पैमाने पर शिक्षक भर्ती घोटाले का मामला सामने आया है। जिसमें निजी प्रबंध तंत्रों द्वारा संचालित जूनियर हाईस्कूलों को सरकार द्वारा कक्षा 6 से 8 तक तो अनुदान दिया जा रहा था लेकिन कक्षा 1 से 5 तक प्रबंध तंत्रों द्वारा निजी खर्चे पर संचालित किया जा रहा था।

बताते हैं सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितम्बर 2014 को अपने आदेश में एक ही प्रागंण में एक ही प्रधानाध्यापक एवं एक प्रबंधतंत्र द्वारा संचालित प्राइमरी विद्यालयों को अनुदान दिये जाने का आदेश पारित किया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक स.न. बेसिक 17505/2015-16 के मुताबिक जूनियर हाईस्कूल में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी वेतन दिये जाने के आदेश दिये गये। जिसके बाद निजी प्रबंधतंत्रों ने पुराने शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाते हुए नये शिक्षकों की भर्ती को अंजाम देना शुरू कर दिया गया। जिसमें प्राइमरी में अध्यनरत छात्र-छात्राओं की संख्या में जबरदस्त इजाफा कर शिक्षकों की बड़ी संख्या में बढ़ोत्तरी कर उनकी तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। बताया जाता है कि शिक्षकों की तैनाती के नाम पर शिक्षा विभाग के अफसरों के नाम पर निजी प्रबन्धतंत्रों द्वारा 15 से 25 लाख की वसूली की गई है बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए विद्यालयों की मान्यता, छात्र संख्या, शिक्षकों की तैनाती में फर्जीवाड़ा किया गया है। बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले जहां प्राइमरी विद्यालयों में दो-तीन शिक्षक तैनात थे वहां अब उनकी संख्या 10 से लेकर 20 तक कर दी गई है। बताते हैं कि पूरे उ.प्र. में ऐसे विद्यालयों की संख्या 116 है। जिसमें अकेले मथुरा जनपद में ही 16 हैं। जिसमें करीब 250 शिक्षकों की भर्ती को अंजाम दिया गया है। जानकार सूत्रों का कहना है कि जहां जूनियर के बाद हाईस्कूल विद्यालय को उच्चीकृत किया गया। वहां प्राइमरी की कक्षाऐं संचालित नहीं थी वहां कागजों में प्राइमरी दर्शाकर शिक्षकों की तैनाती भी की जा रही है।

सुरेश चन्द शर्मा, पूर्व अध्यापक परासौली

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस अनुदान में उन्हीं विद्यालयों को सम्मलित किया जा सकता है जिन विद्यालयों की मान्यता प्राइमरी से जूनियर तक एक साथ ली गई हो। एसआर रजिस्टर एवं प्रधानाध्यापक प्रांगण एक हो, शिक्षक 10 से 15 साल से मामूली वेतन पर तैनात हो, लेकिन प्रबंधतंत्रों ने सभी नियमों को ताक पर रखकर पुराने शिक्षकों के स्थान पर मोटा लेन-देन कर नये शिक्षकों की भर्ती कर दी है।
सूर स्मारक मण्डल आगरा द्वारा संचालित श्री खिमजी महाकवि सूरदास विद्यालय एवं सूर बाल विद्यामन्दिर पारसौली में 16-17 वर्षों तक कार्यरत रहे शिक्षक सुरेश चन्द शर्मा जिसे प्रबंधतंत्र द्वारा हटा दिया गया है ने उच्च अधिकारियों को कई पत्र लिखकर अनुदानित विद्यालयों के रिकॉर्ड में हेरा-फेरी, शिक्षकों की तैनाती में फर्जीवाड़े के आरोप लगाये गये। जिसमें तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजीव कुमार सिंह द्वारा अपनी जांच रिपोर्ट में सुरेश चन्द शर्मा की तैनाती से इंकार किया गया है। जबकि डायट प्राचार्य डॉ० मुकेश अग्रवाल द्वारा जिलाधिकारी मथुरा को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में सूरबाल विद्या मन्दिर में परासौली में कार्यरत होने की पुष्टि करते हुए मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक आगरा या उच्च अधिकारियों से जांच कराने की संतुति की। विद्यालय में फर्जीवाड़ा करने का इसी से अन्दाजा लगाया जा सकता है कि श्री हरिदास खिमजी महाकवि सूरदास विद्यालय को जूनियर की मान्यता 28 मई 2079 को शिक्षा उपनिदेशक आगरा मण्डल विनोद कुमार के हस्त्थाक्षर से दी गई। जबकि कक्षा 1 से 5 तक की मान्यता सूरबाल विद्या मन्दिर परासौली को 27 मार्च 2006 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा दी गई लेकिन प्राइमरी विद्यालय के अनुदान पर आने के चलते सुप्रीम कोर्ट के नियमों को धता बताते हुए एक ही विद्यालय दर्शाकर 15 से 20 लाख की वसूली कर नये शिक्षकों की भर्ती का खेल खेला जा रहा है। जिसका मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
दूसरा मामला मांट के जनता जूनियर हाईस्कूल का है जहां प्राइमरी विद्यालय में 15 शिक्षकों की तैनाती प्रबंधतंत्र द्वारा की जा रही है। जिसकी शिकायत भी उच्च अधिकारियों से करते हुऐ आरोप लगाया गया है कि पुराने शिक्षकों को बाहर कर नये शिक्षकों को 15 से 20 लाख लेकर तैनाती की जा रही है। बताते हैं कि कक्षा 1 से 5 तक की मान्यता जनता बाल विद्यालय मांट से ली गई जनता जूनियर हाईस्कूल की मान्यता वर्ष 1984 तथा हाईस्कूल की मान्यता 13 मार्च 2003 में ली गई। जिसमें प्राइमरी 2013-14 में 232, 2015-16 में 208, 2016-17 में 200 तथा 2017-18 में 269 छात्र-छात्राऐं पंजीकृत हैं जबकि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के दौरान हुई जांच में जिला कॉर्डीनेटर द्वारा अपनी जांच रिपोर्ट में 507 छात्र-छात्राऐं पंजीकृत होना दर्शाया गया। जिसमें मौके पर 482 छात्र-छात्रा होना पाया गया। जबकि 25 को अनुपस्थित बताया गया। बताया जाता है कि पूर्व में शिक्षाध्यन करने वाले शिक्षक गणेश, चमन, सरिता, नीरज, दिव्यांशु, कपिल, सुरेश तिवारी को जूनियर स्कूल में भेज दिया गया। जबकि अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सूत्रों का कहना है इस विद्यालय में दूसरे विद्यालयों के छात्रों का भी पंजीकरण दर्शाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अनुदानित जूनियर-प्राइमरी की मान्यता एक साथ होने के अलावा दोनों का प्रधानाध्यापक एक होना आवश्यक है। लेकिन यहां भी जूनियर प्राइमरी में अलग-अलग प्रधानाध्यापक है। बल्कि एस आर रजिस्टर भी अलग-अलग थे। जानकार सूत्रों का कहना है कि अगर उच्च स्तरीय जांच हो तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े सामने आयेगें। जिसमें पूर्व में जारी प्रमाण पत्रों पर विद्यालयों के अलग-अलग प्रधानाचार्यों के हस्त्थाक्षर हैं। बल्कि अलग-अलग एस.आर रजिस्टर भी हैं जबकि मान्यताऐं भी अलग-अलग हैं।
जनता जूनियर हाईस्कूल के प्रबंधक सुखवीर सिंह ने ‘‘विषबाण’’ से बातचीत में कहा कि प्राइमरी विद्यालय में 15 शिक्षकों की भर्ती पूरी पारदर्शिता एवं नियमानुसार की गई है। भर्ती में 15 से 20 लाख की अवैध वसूली के आरोपों को निराधार बताते हुऐ विरोधी तत्वों द्वारा उनकी छवि धूमिल करने का आरोप लगाया।
इसी तरह राया क्षेत्र के लोकमन दास गनपत स्वरूप इन्टर कॉलेज आयरा खेड़ा में कक्षा 1 से 5 तक की मान्यता बृजान्चल बाल विद्यालय के नाम से हैं जहां 15 शिक्षकों की तैनाती 15 से 20 लाख रूपये लेकर करने तथा पुराने शिक्षकों को बाहर किये जाने का आरोप प्रबंधतंत्र पर है। जबकि विद्यालय के प्रबंधक संजय शर्मा ने दूरभाष पर बताया कि शिक्षकों की तैनाती नियमानुसार करने एवं सभी आरोपों को निराधार बताया है। जबकि ‘विषबाण’ के पास उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार प्राइमरी में राकेश कुमार, प्रधानाध्यापक मोहन लाल शर्मा, सुनील कुमार शर्मा, देवेन्द्र कुमार शर्मा, राजकुमार भारद्वाज सभी सहायक अध्यापक की 2002 से 2006 तक रिकॉर्ड में उपस्थित दर्ज रही है। जिन्हें विद्यालय प्रबंधतंत्र द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विद्यालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। विद्यालय के पूर्व प्रबंधक बनवारी लाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वर्तमान प्रबंधक संजय कुमार शर्मा पर फर्जी तरीके से प्रबंधक पद हथियाने, फर्जी तरीके से प्राइमरी में बच्चों की उपस्थिति दर्शाने, प्राइमरी विद्यालय के नाम में हेर-फेर करने, जांच के दौरान दूसरे विद्यालयों के बच्चों की उपस्थित दर्शाने, 15 से 25 लाख में नये शिक्षकों की भर्ती का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत की गई है। इसके अलावा ग्राम प्रधान सावित्री देवी ने विद्यालय प्रबंधतंत्र पर फर्जी तरीके से प्राइमरी मान्यता एवं जूनियर विद्यालय के नाम को हेर-फेर कर एक ही दर्शाने तथा अवैध रूप से शिक्षकों की नियुक्ति में मोटी रकम वसूलने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी सुप्रीम कोर्ट के मानकों के विपरीत निजी प्रबंधतंत्र द्वारा प्राइमरी एवं जूनियर विद्यालयों की मान्यताओं में हेर-फेर कर शिक्षकों की तैनाती के मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन शिक्षा विभाग के अफसर इस फर्जीवाड़े को दबाने में जुटे हैं।

 

विद्यालयों की प्रबंध समितियों से 10 साल पूर्व दे दिया था इस्तीफा- श्याम

श्याम सुन्दर शर्मा
विधायक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री

मथुरा। अनुदानित प्राइमरी विद्यालयों में शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री एवं विधायक श्याम सुन्दर शर्मा का कहना है कि 10 वर्ष पूर्व ही इरौली, नीमगांव, दलौता, मांट की समितियों से अध्यक्ष पद से त्याग पत्र दे दिया था। साथ में वन महाराज कॉलेज वृन्दावन के प्रबंधक पद को न्याय दिया था। श्री शर्मा ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति शिक्षक भर्ती घोटाले की शिकायत करता है तो उसकी जांच कराने के लिये भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अनुदानित विद्यालयों में फर्जीवाड़े से कोई मतलब नहीं है।