फरार शिक्षकों ने हथियारों की नोंक पर विद्यालयों में लगाई फर्जी उपस्थिति

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मथुरा। जूनियर एवं प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती घोटाले का नेटवर्क लगातार बढ़ता जा रहा है वहीं जांच में चौकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जिसमें भर्ती घोटाले के मास्टर माइन्ड माने जाने वाले शिक्षकों की तलाश में एसटीएफ छापेमारी कर रही है तो वहीं दूसरी ओर आरोपी अपने विद्यालयों में अपनी उपस्थिति लगातार दर्शाकार जांच टीमों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह् लगा रहे हैं तो वहीं आरोपी शिक्षक निलम्बन के बाद फरार हो गये हैं।
जूनियर एवं प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले के तार पूरे उ.प्र. में फैलते जा रहे हैं बल्कि अन्य राज्यों में इसके खुलासे हो रहे हैं। जबकि घोटाले के मास्टर माइन्ड कहे जाने वाले जूनियर हाइस्कूल के डहरूआ ब्लाक मांट के प्रधानाध्यापक आलोक उपाध्याय रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद भी 2 से 7 जुलाई तक रिकॉर्ड में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। फिर 9 से 17 तक चिकित्सा अवकाश पर रहा है। इसके बाद 18 से 20 जुलाई तक डहरूआ विद्यालय पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे

वेगराज सिंह चाहर

हैं। विद्यालय के बच्चों की मानें तो आलोक उपाध्याय दो दिन विद्यालय आये हैं। इसी तरह दूसरे प्रमुख आरोपी वेगराज सिंह चाहर जूनियर हाईस्कूल भगवान गढ़ी ब्लाक नौहझील पर 13 जुलाई तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके अलावा राजवीर गुर्जर भी अपने विद्यालय पर उपस्थिति दर्शाते रहे हैं। चौथे प्रमुख आरोपी लाखन सिंह भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं। बल्कि 23 जुलाई सोमवार को दोपहर लाखन सिंह को जिलापंचायत कार्यालय में खुलेआम घूमता देखा गया। जिसकी सूचना प्रशासन को दिये जाने के बाद गिरफ्तार नहीं किया जा सका।
जानकार सूत्र बताते हैं कि राजनैतिक संरक्षण के चलते शिक्षक भर्ती घोटाले बाजों के हौंसले बुलन्द हैं। चर्चा तो यह भी है कि एक आरोपी को गिरफ्तार करने के बावजूद भी एक मंत्री के कहने पर छोड़ दिया गया। सूत्र बताते हैं फर्जी घोटाले के मुख्य आरोपियों को लखनऊ में एक वरिष्ट मंत्री के आवास पर देखा गया है। जानकारों का कहना है कि एसटीएफ को आलोक उपाध्याय के विद्यालय के रिकॉर्ड में उपस्थित होने की जानकारी मिलने पर जब अन्य अध्यापकों से बात की गई तो बताया गया कि हथियारों की नौंक पर उपस्थिति दर्ज करा दी जाती है। शिक्षा विभाग द्वारा पिछले दिनों वेगराज सिंह सहित 84 अन्य को निलम्बित कर बीआरसी केन्द्रों से सम्बद्ध कर दिया। जहां वह उपस्थिति दर्ज नहीं करा रहे हैं। जबकि फरार शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों पर उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं। तमाम प्रयासों के बाद फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले के मास्टर माइन्ड कहे जाने वाले अयेरा विद्यालय के निलम्बित शिक्षक राजवीर सिंह गुर्जर को एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार कर लिया है। जबकि फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले के एक और मास्टर माइन्ड माने जा रहे प्राथमिक विद्यालय अकबरपुर प्रथम (टेंटीगाँव) ब्लाक मांट के प्रधानाध्यापक भूपेन्द्र सिंह के विरूद्ध एफआईआर दर्ज होने के बाद फरारा घोषित हैं वहीं दूसरी तरफ अपने भाई हरिओम के माध्यम से 2 जुलाई 2018 को भूपेन्द्र सिंह विद्यालय पहुंचकर जहां रिकार्ड में अपनी उपस्थिति दर्ज करते हैं। बल्कि विद्यालय के रिकॉर्ड के साथ मैडीकल और फिर अभी तक लापता हैं। जबकि उन्हें विभाग द्वारा निलम्बित कर दिया गया है।

‘‘विषबाण’’ टीम द्वारा जुटाये गये साक्ष्यों के अनुसार भूपेन्द्र सिंह की पत्नी शशि चौधरी जूनियर हाइस्कूल पब्बीपुर की प्रधानाध्यापक है ने फर्जी शिक्षक गिरीश चन्द को कार्यभार (योगदान आख्या) कराई जिसमें शशि चौधरी को निलम्बित कर दिया गया। सूत्रों का कहना है फर्जी शिक्षक की उपस्थिति की आख्या स्वयं भूपेन्द्र सिंह की है। जबकि हस्ताक्षर शशि चौधरी द्वारा किये गये हैं।
शशि चौधरी 20 मई के बाद से विद्यालय से लगातार अनुपस्थित चल रही है। भूपेन्द्र के भाई हरिओम द्वारा रजिस्टरी पत्र द्वारा शशि चौधरी के अस्वस्थ्य होने के कारण विद्यालय ना आने के संबंध में अवगत कराया गया है।
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि भूपेन्द्र सिंह एवं उसकी पत्नी के कागजातों की भी उच्च स्तरीय जांच की जाये तो वह भी फर्जी साबित होंगे। सूत्रों का कहना है कि करोड़ों की लागत से भूपेन्द्र सिंह अपने पैत्रिक गांव कारव अड्डा में करोड़ों की लागत से निर्मित विद्यालय संचालित है। बताते हैं भूपेन्द्र सिंह बल्देव क्षेत्र के एक राजनैतिक पार्टी के नेता के कॉलेज में 2004 से कार्यरत था जहां से फर्जी कागजात तैयार होने का कार्य होता था। सूत्रों का दावा है फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रयुक्त अधिकांश फर्जी डिग्रियां एवं सार्टिफिकेट इसी कॉलेज में तैयार किये जाते रहे हैं। जानकारों का कहना है उक्त कॉलेज संचालक पूर्व में पार्टी का जिलाध्यक्ष भी रहा है। जानकारों का कहना है कि फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले के प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिये जहां पूर्व उच्च शिक्षामंत्री एवं मांट विद्यायक श्यामसुन्दर शर्मा अपना दबाव बनाये हुऐ हैं। वहीं दूसरी तरफ घोटालेबाजों को बचाने के लिये कुछ सत्ताधरी नेता एवं मंत्री भी जमकर पैरवी में जुटे हैं। चर्चा तो यह भी है कि फरार प्रमुख आरोपी सत्ताधरी नेताओं एवं मत्रिंयों के इर्द-गिर्द होने से एसटीएफ एवं पुलिस हाथ नहीं डाल पा रही है। जबकि फरार आरोपी गिरफ्तार अन्य आरोपियों की जमानत के बाद न्यायालय में आत्म समर्पण की तैयारी में हैं।

शिक्षिका ने ही बना दिया शिक्षिका को बलि का बकरा

मथुरा। ‘‘रस्सी को सांप और सांप को रस्सी’’ बनाने में पुलिस भले ही बदनाम हो लेकिन फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले में भी शिक्षकों के अजीबों गरीब खेल उजागर हो रहे हैं। जिसमें पूर्व माध्यमिक विद्यालय मिरताना में फर्जी शिक्षक की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा कर जूनियर की प्रधानाध्यापिका को मौहरा बना कर उसे निलम्बित करा कर अपने को बचाने में सफल हो गई।
विज्ञान एवं गणित के शिक्षक भर्ती घोटाले में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जिसमें पूर्व मा. वि. मिरताना में फर्जी शिक्षक हुकम सिंह को तैनाती 19-02-2017 को विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मिनी उपाध्याय द्वारा कराई गई। जिसमें प्राथमिक वि. मिरताना की प्रधानाध्यापिका रश्मि अग्रवाल के हस्ताक्षर गवाह के रूप में कराकर पूर्व माध्यमिक विद्यालय मिरताना के प्रधानाध्यापक की मोहर हस्ताक्षर के नीचे दर्ज कर दी गई। जिसके आधार पर रश्मि अग्रवाल को निलम्बित कर दिया गया। रश्मि अग्रवाल द्वारा बेसिक शिक्षा निदेशक को लिखे पत्र में कहा गया है कि फर्जी शिक्षक हुकम सिंह की भी तैनाती स्वयं मिनी उपाध्याय द्वारा की गई। जबकि धोखाधड़ी से उसे हस्ताक्षर कराये गये। बल्कि कभी भी प्रधानाध्यापक की मोहर उसे नहीं दी गई। सूत्रों का कहना है कि मिनी उपाध्याय ने अपनी उपस्थिति का रिकॉर्ड विद्यालय से गायब कर अपने को अनुपिस्थत दर्शाने का प्रयास किया है। जबकि उस समय के मिड डे मील के रिकॉर्ड में उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं। हेर-फेर का शिकार हुई रश्मि अग्रवाल ने उच्च अधिकारियों से निलम्बन निरस्त कराने की मांग की है।

नेता मेहरबान तो घोटाले बाज पहलवान

आलोक उपाध्याय

मथुरा। शिक्षक भर्ती घोटाले के प्रमुख आरोपियों पर सत्ताधारी नेताओं की सम्बंधों के चलते किस तरह शासन प्रशासन मेहरबान बना हुआ है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घोटाले के मुख्य आरोपी आलोक उपाध्याय के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद भी ना तो गिरफ्तार किया जा सका है और ना ही 6 जुलाई तक शिक्षा विभाग द्वारा निलम्बित किया जा सका। बल्कि जून 2018 तक के वेतन को भी स्वीकृत कर दिया गया है। जबकि उनके सहपाठी वेगराज सिंह सहित अन्य को निलम्बित किया जा चुका है। बीएसए चन्द शेखर सिंह ने ‘विषबाण’ से बातचीत में स्वीकार किया कि आलोक उपाध्याय को निलम्बित नहीं किया गया है। जून के वेतन के सम्बंध में सवाल के जबाव पर लेखाधिकारी से जानकारी लेने के लिये कहा।

शिक्षकों के भेष में छुपे हैं गुण्डे

मथुरा। बच्चों के भविष्य बनाने वाले शिक्षकों के भेष में तमाम दबंग एवं गुण्डे भी शामिल हो गये हैं जो राजनैतिक संरक्षण के चलते शिक्षक, अधिकारियों, बाबुओं को तमंचा, पिस्टल दिखाकर जबरन रिकॉर्ड पर हस्ताक्षर करा लेते हैं। बल्कि खामोश रहने पर भी मजबूर कर देते हैं। ब्लॉक संसाधन केन्द्र नौहझील पर कार्यरत बाबू आरएम पाठक कहते हैं कि गलत कार्य का विरोध करने पर दबंग शिक्षकों द्वारा कार्यालय से उनकी बाइक चोरी करा दी गई। बल्कि कार्यालय से अपने पैत्रिक गांव कौलाहर लौटते समय लाठी-डण्डों से हमला बोलकर मारने का प्रयास किया गया। वह कहते हैं कि हथियारों की नौंक पर कई दबंग शिक्षक घर बैठे वेतन ले रहे हैं। जिन्हें राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है।