52 लाख के बिजली के बिल ने उड़ाई किसान की नींद

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मथुरा। सपा-बसपा सरकारों में विद्युत विभाग के अफसरों के भ्रष्टाचार से त्रस्त उपभोक्ताओं को सरकार बदलने और प्रदेश के उळर्जा मंत्री मथुरा से होने के बावजूद भी लूट से राहत नहीं मिल पा रही है।
सरकार बसपा की हो या सपा की या फिर भाजपा की विद्युत विभाग में भ्रष्ट अफसरों की तूती सिर चढ़कर बोलती है। जनता से लूट का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है जो सपा-बसपा की सरकारों में था। नन्दगांव ब्लॉक के रीठोरा गांव निवासी साधारण किसान जगदीश पुत्र मदनलाल शर्मा ने वर्ष 1996 में एक किलोवाट का कनैक्शन बगैर मीटर के 60 रु प्रतिमाह पर लिया। जिसका 2008 तक का कुल बिल 12 हजार रुपये जमा करा दिया गया। इसके बाद विभाग ने उनके घर में मीटर लगाया तो उसे 2 किलोवाट कर दिया गया। मीटर ने चमत्कार दिखाना शुरू किया तो उसकी शिकायत करने पर तीन मीटर बदल दिये गये। जिसमें मीटरों ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि साधारण किसान का बिल शिकायत करते-करते 48 लाख हो गया। जो भाजपा की योगी सरकार में 52,23,139 रु पहुँच गया। सरकार बदली तो पीड़ित को लगा कि उसे अब अवश्य न्याय मिलेगा। वह उर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा से लेकर उच्च अधिकारियों तक मिला लेकिन हालत जस से तस रहे। फिर पीड़ित ने लोक अदालत में गुहार लगाई। जहां से अफसरों को नोटिस भेजे गये लेकिन उन्हें भी हवा में उड़ा दिया गया। थककर उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया गया। जो फोरम में अन्तिम सुनवाई में है।
दूसरा मामला भगवान सिंह पुत्र चन्दन सिंह निवासी बरसाना का है। जो परिवार के पालन पोषण के लिये चाय की दुकान चलाते हैं। जिसमें विद्युत कनेक्शन नाम पर 6 हजार की राशि नरेन्द्र नामक विद्युत कर्मचारी द्वारा वसूली गई लेकिन दो साल तक कनेक्शन नहीं दिया गया बल्कि इनवर्टर से रोशनी जलाने के नाम पर विजिलेंस द्वारा भगवान सिंह को विद्युत चोरी के आरोप में पुलिस के हवाले कर दिया गया। जहाँ 6 हजार की वसूली किये जाने की बात बताये जाने पर नरेन्द्र द्वारा 2950 की रशीद जो 18.07.2004 को काटी गई थी देकर कनेक्शन लगाने के बदले 2000 की और माँग की गई। जिसमें मीटर लगाने के बाद कनैक्शन चालू नहीं किया गया बल्कि बगैर बिजली चालू किये ही 0 मीटर रीडिंग का 31,116 का बिल उपभोक्ता को भेज दिया गया। जिसके जमा ना होने पर उसे कागजों में काट दिया गया। पीड़ित ने उर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा से मुलाकात कर पूरे वाक्या से अवगत कराया तो गोवर्धन एक्सईएन को समस्या निराकरण के आदेश दिये। इसके बावजूद भी 7 माह बाद भी हालत जस से तस हैं।
इसी तरह कस्बा सुरीर निवासी राजेश रावत पुत्र वेद प्रकाश रावत का मीटर खराब हो गया जिसे बदलवाने की गुहार विद्युत विभाग के अफसरों से की गई। जिसमें जेई सुरीर ने मीटर बदलने के स्थान पर लाईन को सीधा जोड़ दिया। विजिलेंस टीम ने छापा मारा तो उपभोक्ता ने पूरे घटनाव्रळम से एसडीओ माँट को अवगत कराया। जिसमें एसडीओ ने बकाया राशि का बिल जमा करने पर रिपोर्ट दर्ज ना कराने का आश्वासन दिया जिसपर उपभोक्ता ने 23 फरवरी 2018 को बकाया राशि 26,815 रु तथा कनेक्शन जोड़ने की राशि 600 रुपये जमा करा दी। लेकिन इसके बावजूद उसके विरू( विद्युत चोरी की नियम विरू( रिपोर्ट दर्ज कराई ही बल्कि समनशुल्क 8000 राजस्व 3,078 तथा 25 रुपये नोटिस खर्चा बताकर 11,103 का धारा 135 का नोटिस 15 जून 2018 की तिथि का भेज दिया गया। पीड़ित उपभोक्ता कई दिनों से भटक रहा है लेकिन कोई भी इसकी फरियाद सुनने को तैयार नहीं है। इसी तरह डी.डी. प्लाजा स्थित अंकुर बंसल द्वारा 5 वर्ष पूर्व अपनी दुकान का पूरा बिल जमा कर कनेक्शन बिच्छेदन करा दिया। जब किरायेदार द्वारा पुनः नये कनेक्शन के लिये आवेदन किया तो बगैर मीटर कनेक्शन के 29,700 रुपये की बकाया राशि दर्शाते हुए नया कनेक्शन देने से इंकार कर दिया गया। जब कुछ दलालों के माध्यम से उच्च अधिकारियों से सम्पर्क स्थापित किया तो पुराने बकाया को खत्म करने एवं नये कनेक्शन का ओएम देने के नाम पर 8000 रिश्वत की माँग की गई। जिसकी शिकायत उर्जा मंत्री के भाई एवं प्रतिनिधि सूर्यकान्त शर्मा से की गई तब जाकर 742 रु. ओएम की रशीद काटकर नया कनेक्शन दिया गया। इसी तरह के दर्जनों मामले सामने आ रहे हैं। जिससे पीड़ित उपभोक्ता या तो सुविधा शुल्क देकर समाधान करा रहे हैं या फिर न्यायालय- उपभोक्ता फोरम की शरण लेने पर मजबूर हैं। लेकिन उर्जामंत्री के गृह जनपद में अधिकारियों के भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।