फर्जी शिक्षक भर्ती मामलाः संघ-भाजपा से जुड़े हैं घोटाले बाजों के गहरे रिश्ते

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मथुरा। भ्रष्टाचार की नींव पर रखी गई कोई भी इमारत मजबूत नहीं बन सकती है। लेकिन मथुरा में देश के मासूम कर्णधारों का भविष्य भ्रष्टाचार-घोटालों की नीव पर ही रखा जा रहा है जहां 15-15 लाख की रिश्वत के बदले पात्रों को वंचित कर अपात्रों को 110 शिक्षकों के पद पर फर्जी तरीके से भर्ती कर तैनाती करा दी गई। मामले का खुलासा होने पर एसटीएफ ने 16 छोटी-छोटी मछलियों को गिरफ्तार कर लिया गया जिसमें से 11 आरोपी जमानत पर जेल से छूट कर बाहर आ चुके हैं जबकि 5 आरोपी मेरठ जेल में हैं। जो अपनी जमानत में जुटे हुए हैं वहीं घोटाले के बड़े मगरमच्छ सत्ताधरी राजनेताओं के संरक्षण में आज भी खुले आम योगी सरकार की ईमानदार कार्यप्रणाली को चुनौती दे रहे हैं।
उ.प्र. में सरकार सपा की हो या बसपा की या फिर भाजपा की शिक्षा माफियाओं एवं घोटालेबाजों के सदैव हौसले बुलन्द रहे हैं। वर्ष 2008-09 में बसपा सरकार के दौरान पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राजू राणा के सानिध्य में अतरिक्त कक्षा-कक्ष, बाउंड्रीवाल, मिड-डे मील आदि के नाम 56 करोड़ से अधिक का घोटाला सामने आया। जिसमें एक शिक्षक को घोटाले के नाम पर जेल भेजकर बड़े मगरमच्छों को जांच में सुरक्षित निकाल लिया गया। इस घोटाले के बाद सपा सरकार में 2014 से 12460, 15000 तथा 29300 शिक्षकों की भर्ती निकाली गई, जिसमें पात्रों को वचित कर बड़े पैमाने पर 15-15 लाख के बदले फर्जी शिक्षकों की भर्ती कर विद्यालयों में तैनाती दे दी गई। जिनकी श्कियत दर शिकायतें होती रही और अफसर जांच पर जांच कर पर्दा डालते रहे।

रिश्वत खोरी में विजीलेंस द्वारा पकड़वाये जाने के बाद शिक्षक भर्ती घोटाले के प्रमुख आरोपी आलोक उपाध्याय (बाएं) घेरे में एवं वेगराज सिंह चाहर (दाएं) घेरे में साथ में वरिष्ठ भाजपा नेता एस.के. शर्मा थाना मांट में शिकायत कर्ता का सम्मान करते हुए।

लेकिन मीडिया के खुलासे के बाद करीब 35 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एसटीएफ ने 16 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जबकि बीएसए संजीव कुमार सिंह को निलम्बन कर दिया गया।
एसटीएफ की जांच में घोटाले के तार लखनऊ-दिल्ली तक बड़े नेताओं- अफसरों से जुड़े होने की जानकारी होने के बाद मामले पर पर्दा डालने का खेल शुरू हो गया। जिसमें शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के लिये एसआईटी गठित करने वाले मथुरा एसएसपी प्रभाकर चौधरी का तबादला कर दिया गया। बल्कि 16 की गिरफ्तारी के बाद अन्य किसी की गिरफ्तारी एसटीएफ या एसआईटी नहीं कर सकी और अपनी जांच रिपोर्ट एसएसपी मथुरा को सौंप दी।

सरकार सपा की हो या भाजपा की घोटाले बाजों का जलवा कायम रहा है। सपा सरकार के दौरान राज्यपाल से वार्ता करते यूटा के आलोक उपाध्याय अपने मित्रों के साथ।

इस घोटाले पर पर्दा डालने के खेल का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 16 आरोपियों को जेल भेजने के बाद विवेचनाधिकारी द्वारा कोई पर्चा नहीं काटा गया। जिससे 3 आरोपी जमानत कराने में सफल हो गये। जबकि जांच में फर्जी निकले शिक्षकों को छोड़कर शेष 101 को भी गिरफ्तारी नहीं किया गया। बल्कि घोटालेबाजों के कब्जे से डिस्पैच रजिस्टर भी बरामद नहीं किया जा सका है। शिक्षक भर्ती घोटाले में लिप्त घोटालेबाजों के सम्बन्ध में ‘‘विषबाण’’ द्वारा जानकारी जुटाई गई तो चौंकाने वाले खुलासे सामने आये। बीएसए कार्यालय में बाबू महेश शर्मा द्वारा आगरा में होटल निर्माण कराना बताया गया तो वहीं मांट के भद्रवन निवासी आलोक उपाध्याय जिनके पिता भी सेवानिवृत्ति अध्यापक हैं ने चन्द सालों में परिवार एवं रिश्तेदारों के नाम पर डेढ़ सौ बीघा से अधिक जमीन की खरीद फरोख्त की बल्कि मथुरा में आलीशान कोठी का निर्माण भी किया गया है। आलोक उपाध्याय अधिकारियों पर अपना प्रभाव बनाये रखने के लिए अखिल भारतीय यूटा संगठन का गठन कर स्वयं राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गया बल्कि अपने सहपाठी घोटालेबाज नौहझील क्षेत्र के गांव सीगौनी निवासी वेगराज चाहर जो भगवान गढ़ी विद्यालय पर कार्यरत है को यूटा का अध्यक्ष बना दिया गया। आलोक उपाध्याय पूर्व में कथित शिक्षक बनाकर तत्कालीन अफसरों पर दबाब बनाता रहा बल्कि 2010 में छाता, नन्दगांव, फरह ब्लाक में अतरिक्त कक्षा-कक्ष, बाउंड्रीवाल घोटाले की शिकायत कर उसका खुलासा भी कर चुका है। जिसकी गूंज पूरे देश में हुई थी। पहले वह मांट क्षेत्र के विधायक पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री श्याम सुन्दर शर्मा के नजदीकी रहे हैं। जैसे ही श्री शर्मा सत्ता से बाहर हुए तो आलोक उपाध्याय एवं उनके सहपाठी वेगराज चाहर ने सत्ताधारी भाजपा नेताओं का दामन थाम लिया। जिसमें अपनी ताकत एवं पहुंच को दिखाते हुए उ.प्र. राज्यपाल राम नाईक भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. दयाशंकर सिंह, आर.एस.एस के विभाग प्रचारक धर्मेन्द्र सहित अन्य कई मंत्री- विधायकों के साथ सोशल मीडिया पर फोटो डालते रहे। शिक्षक भर्ती घोटाले के प्रमुख आरोपी माने जा रहे वेगराज (मडुआका) ब्लॉक नौहझील में एक एकड़ से अधिक जमीन पर करोड़ो की लागत से शारदा विद्यापीठ आवासीय कॉलेज का निर्माण कराया गया है। जिसके उत्सव के नाम पर कई भाजपा नेताओं को आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। वेगराज चाहर की मथुरा में करोड़ों की आलीशान कोठी सौंख रोड़ स्थिति कालॉनी में है। तो वहीं उसके पास नई स्कार्पियो गाड़ी भी है। जिसका वीआईपी न. लेने के लिये 15 हजार की राशि भी खर्च की गई। शिक्षा घोटाले से जुड़े सूत्रों की मानें तो वेगराज चाहर अपने स्कूल का स्टाफ भी मथुरा से 80 किलोमीटर दूर निजी वाहनों से अपने स्कूल भेजता है। गांव से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चन्द सालों में 50 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति रिश्तेदारों, परिवार, परिचितों के नाम से खरीद फरोख्त की गई है। तीसरा प्रमुख आरोपी पुष्पेन्द्र सिंह निवासी कारव, ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा के कारव में रात्रि विश्राम कार्यक्रम में फोटो शेयर करता नजर आ रहा है। जो वेगराज, आलोक का नजदीकी मित्र है और उसे एसटीएफ गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। 18 जून तक घोटाले से सम्बधिंत खबरों को अपने फेसबुक पर डालता रहा।
शिक्षक भर्ती घोटाले की विवेचना में कौन दोषी और कौन निर्दोष साबित होगा ये तो वक्त बतायेगा लेकिन फर्जी शिक्षक भर्ती घोटाले के बड़े मगरमच्छों एवं फर्जी शिक्षकों की गिरफ्तारी की रफ्तार धीमी हुई है उससे नहीं लगता कि शिक्षा माफियाओं को राजनैतिक संरक्षण के चलते कानून सजा दे पायेगा। एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार 16 आरोपियों में से 2 संविदाकर्मी कम्प्यूटर ऑपरेटर फर्जी शिक्षक सहित 11 आरोपी जमानत पर जेल से छूटकर बाहर आ चुके हैं। जबकि मेरठ जेल में बन्द 5 आरोपी जमानत की तैयारी में लगे हैं। जो अन्य नामजद फरार हैं वह भी बे-धड़क होकर खुले आम घूम रहे हैं। गुरूवार को जिला बैसिक शिक्षा अधिकारी चन्द्र शेखर सिंह से ‘विषबाण’ ने वार्ता करने की कोशिक की तो उन्होंने यह कहते हुए मिलने से इंकार कर दिया कि अभी वह व्यस्त हैं ।

इससे पूर्व एसआईटी द्वारा 19 फर्जी शिक्षकों के विरूद्ध कराई गई एफ.आई.आर के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। जबकि 2008-09 कक्ष निर्माण में घोटाले के दोषियों को भी आज तक सजा नहीं मिल सकी तो शिक्षक भर्ती घोटाले के आरोपियों को ही कौन फांसी पर चढ़ायेगा। यही कारण है कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद ईमानदार सरकार में घोटाले-भ्रष्टाचारी भी बे-खौफ नजर आ रहे हैं और यह कहावत सटीक साबित हो रही है- ‘‘दामोदर बैठे रहें, दाम करे सब काम’’ फिर चाहे सत्ता किसी भी दल की हो।

यूटाः जिसने शिक्षा विभाग को जमकर लूटा

यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन या अखिल भारतीय यूटा। इसके पदाधिकारी आलोक उपाध्याय, पुष्पेन्द्र सिंह, वेगराज सिंह जो विजिलेंस में अपनी पकड़ के दम पर न केवल अपने अनर्गल कार्य कराते थे, बल्कि अब तक विजिलेंस के साथ मिलकर कई कर्मचारियों को भी फंसा चुके हैं। यूटा के एक पदाधिकारी कारब निवासी पुष्पेंद्र सिंह को एसटीएफ अपनी गिरफ्त में ले चुकी है और आलोक उपाध्याय व वेगराज चौधरी के खिलाफ भर्ती घोटाले में एफआईआर कराई गई है ये लोग फरार चल रहे हैं।
सूत्रों की माने तो यूटा का काम विजिलेंस को मैनेज करने के साथ विजिलेंस के नाम पर उन अधिकारियों को ब्लैकमेल करना था जो इनका कार्य नहीं करते थे। जिस खंड शिक्षा अधिकारी ने शिक्षक भर्ती घोटाले में उनका साथ नहीं दिया उन्हें विजिलेंस के नाम पर धमकाया गया। जिन प्रधान अध्यापकों ने अपने विद्यालयों में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति होने में रोड़ा अटकाया उन्हें भी विजिलेंस के नाम पर डरा धमका कर वहां फर्जी शिक्षकों की तैनाती दिला दी गई। इसके बदले में यूटा के पदाधिकारी अपने लोगों को फर्जी शिक्षक के तौर पर नियुक्ति दिलाते रहे हैं।
इनके साथ ही राजवीर गुर्जर नामक शिक्षक की भूमिका पूरे घोटाले में बेहद महत्वपूर्ण रही है किसी भी अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर करने में माहिर इस शिक्षक के फर्जी हस्ताक्षर के आधार पर ही गणित विज्ञान शिक्षक भर्ती में बैक डेट में सौ से अधिक फर्जी नियुक्तियां दिलाई गई हैं।

शिक्षा विभाग में दलाल शिक्षकों का चलता है राज

विभिन्न विभागों के कर्मचारियों-अधिकारियों द्वारा बनाई यूनियन-संगठन भले कर्मचारियों के लिये केई हित की लड़ाई लड़े या नहीं लेकिन संस्था पदाधिकारियों के काले कारनामें समय-समय पर उजागर होते रहते हैं। शिक्षक भर्ती घोटाले में भी शिक्षक संगठनों के कथित नेताओं की लिप्तता से संगठनों की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह् लग गया है।
कर्मचारियों के हितों के नाम पर खड़े किये जा रहे संगठनों के पदाधिकारियों के कारनामे शिक्षक भर्ती घोटाले में एक बार फिर सामने आये हैं जिसमें शिक्षक संगठन अखिल भारतीय यूटा के स्वयंभू राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक उपाध्याय, जिलाध्यक्ष वेगराज सिंह चाहर, लाखन सिंह चौधरी को शिक्षक भर्ती घोटाले में मुख्य आरोपी माना जा रहा है। जिसमें तीनों को ही 50 से 100 करोड़ की सम्पत्ति का मालिक माना जा रहा है।

शिक्षक भर्ती घोटाले में फरार आरोपी वेगराज सिंह (काले घेरे में), आरएसएस के विभाग प्रचारक धर्मेन्द्र (लाल घेरे में) को बुके देकर सम्मानित करते हुए साथ में उनके घोटाले के दूसरे आरोपी आलोक उपाध्याय (काले घेरे में)।

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा जो घोटाले के खुलासे का दावा तो बहुत करते हैं लेकिन ‘‘विषबाण’’ की टीम ने उनके आवास पर पहुंचकर घोटाले से सम्बन्धित अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए कहा तो उन्होंने फाइल पास न होने का बहाना करते हुए शीघ्र जानकारी उपलब्ध कराने का वायदा किया। लेकिन दर्जनों बार सम्पर्क करने का प्रयास किया तो कभी फोन रिसीव नहीं किया गया तो कभी बाहर होना बताया गया। लेकिन 20 दिन तक कोई जानकारी नहीं दे सके। बताते हैं आरोपी आलोक उपाध्याय, वेगराज एवं राजेश शर्मा मांट क्षेत्र के ही रहने वाले हैं। चर्चा तो यह है कि फर्जी शिक्षकों की हिस्सेदारी को लेकर आपसी लूट तानाशाही के चलते एक-दूसरे तथा अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिये शिकायतें की गईं। जिनके तूल पकड़ने के बाद अपनों को फंसते देख मामले पर पर्दा डालने का खेल शुरू कर दिया गया और अब नारा गूंजने लगा कि ‘‘हम सब एक हैं’ कोई अलग नहीं।

 

घोटाले बाजों ने पूरे परिवार को बना दिया शिक्षक

लाखन सिंह

शिक्षक भर्ती घोटाले में खुद को पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के एक गुट विशेष का जिलाध्यक्ष बताने वाला लाखन सिंह चौधरी का नाम भी सामने आया है। एसटीएफ ने जिन 23 शिक्षकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है उनमें इस शिक्षक का नाम भी शामिल है।
लाखन सिंह चौधरी निवासी विधिपुर सादाबाद है और बलदेव के भरतीया स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में तैनात है। लाखन सिंह चौधरी के फर्जीवाड़े का भी पुराना इतिहास रहा है। मथुरा के तत्कालीन बीएसए हरपाल सिंह के समय में लाखन सिंह प्रमोशन के लिए अपनी जन्म तिथि में बदलाव करने के चलते निलंबित भी किए गए थे।

पुष्पेन्द्र सिंह

मथुरा में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले में चौधरी लाखन सिंह ने अपने परिवार के सभी लोगों को

आलोक उपाध्याय

शिक्षक बना दिया है। वर्ष 1998 में उन्होंने अपने भाई राजेश चौधरी को पूर्व सैनिक बताते हुए शिक्षक बना दिया जबकि हकीकत है कि इनका या इनके भाई का आर्मी से कोई नाता नहीं रहा है। ये शिक्षक नेता अपने पुत्र, पुत्री, पुत्र वधू व दामाद को भी शिक्षक बना चुके है। हालांकि ये अपनी अनपढ़ बीवी को शिक्षिका नहीं बना सके हैं इसीलिए ये अक्सर मलाल में कहते हैं कि चंदा अगर तू आठ पास भी होती तौ तोय मास्टरनी बनाय देतौ।
सूत्रों की माने तो चौधरी लाखन सिंह शिक्षक भर्तियों में बड़ी संख्या में अपने अभ्यर्थी घुसाते रहे हैं और हाथरस और मथुरा में शिक्षा क्षेत्र में अपनी दलाली के लिए माहिर माने जाते हैं। शिक्षकों की भर्ती में बेहिसाब दौलत कमाई है और अपने गांव विधि पुर में लाखन सिंह ने डीएलसी इंटर कॉलेज के नाम से विद्यालय खोला है इसके साथ ही भरतपुर में भी चौधरी लाखन सिंह एक विद्यालय का निर्माण करा रहे हैं।

शिक्षक भर्ती घोटाले में भाजपा नेता मौन क्यों -श्याम

श्याम सुन्दर शर्मा
विधायक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री

उ.प्र. के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री एवं विधायक श्याम सुन्दर शर्मा जिनके प्रयासों से उच्च जांच समिति का गठन किया गया ने ‘‘विषबाण’’ से बातचीत में शिक्षक भर्ती घोटाले में भाजपा सरकार पर प्रश्न चिन्ह् लगाते हुए कहा कि ईमानदार सरकार में कोई भी मंत्री या भाजपा नेता शिक्षक भर्ती घोटाले पर अपना मुँह नहीं खोल रहा है। सभी ने मौन धारण कर लिया है। जिससे लगता है कि शिक्षक भर्ती घोटाले में बड़े लोग शामिल हैं जिन्हें जांच के नाम पर बचाने का खेल हो रहा है। श्री शर्मा ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए घोटाले बाजों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है।