एसएसपी के तबादले के लिए सटोरियों-शिक्षक भर्ती घोटाले बाजों से वसूली गई 5 करोड़ की राशि

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मथुरा। तीन माह के संक्षिप्त कार्यकाल में जनता के दिलों पर राज करने वाले वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी के तबादले के बदले पार्टी के एक कद्दावर नेता ने राष्ट्रीय नेता के नाम पर शिक्षक भर्ती घोटालेबाजों एवं सटोरियों के गठजोड़ से 5 करोड़ की राशि वसूले जाने की गूंज ऊपर तक सुनाई दे रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी द्वारा अपराधियों के साथ-साथ माफियाओं पर नकेल कस दी गई थी जिससे माफियओं के कारोबार ठप हो गये। सूत्रों का कहना है कि एसएसपी द्वारा आईपीएल के सट्टा कारोबार से जुड़े भाजपा एवं आरएसएस के पदाधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की गई जिसमें एक भाजपा नेता सहित चार को तो गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। लेकिन संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का भाई एवं एक पूर्व विधायक का पुत्र भाग जाने में सफल रहे। जिनकी गिरफ्तारी के लिये कई स्थानों पर दबिश दी गई। लेकिन वह हाथ नहीं आ सके और वह मथुरा छोड़कर दूर निकल गये। बल्कि अन्य सटोरियों ने भी मथुरा छोड़ दिया। जबकि दूसरी तरफ कई भाजपा नेताओं से एसएसपी का टकराव हो गया। जिसमें पार्टी नेताओं ने प्रतिष्ठा बनाते हुए प्रभाकर को हटाने के लिये पूरी ताकत झौंक दी लेकिन सफल नहीं हो सके।
आरएसएस-भाजपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि शिक्षक भर्ती घोटाले एवं फरार सटोरियों से संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की नजदीकी सम्बंधों के चलते एक स्थानीय वरिष्ठ नेता के
माध्यम से कई बड़े नेताओं से मुलाकात कराई गई। बल्कि इसके लिये संघ के अन्य पदाधिकारियों का सहयोग भी लिया गया। शिक्षक भर्ती घोटाले एवं सटोरियां से नजदीकी रखने वाले सूत्रों का दावा है कि एसएसपी के तबादले के नाम पर 5 करोड़ की राशि एकत्रित कर एक नेता के हवाले की गई। जिसके बाद कार्यकर्ताओं के सम्मान का हवाला देते हुए एसएसपी का तबादला सीतापुर किया गया। पूरे घटनाक्रम से जुड़े सूत्र बताते हैं कि रकम की वसूली एक बड़े राष्ट्रीय नेता के नाम पर की गई। आखिर वह रकम किसकी जेब में गई यह किसी को पता नहीं है। जानकार सूत्रों का कहना है कि एसएसपी के ट्रांसफर होने के बाद फरार चल रहे संघ के एक जिलास्तरीय वरिष्ठ पदाधिकारी का सट्टा कारोबारी भाई अपने सहपाठियों के साथ मथुरा लौट आया। वहीं एसएसपी प्रभाकर चौधरी द्वारा बीएसए कार्यालय में महेश शर्मा के सील किये गये कमरे को खुलवाकर रिकार्ड को कब्जे में ले लिया गया जबकि शिक्षक भर्ती घोटाले में एसटीएफ द्वारा की गई एक साथ 16 लोगों की गिरफ्तारी के बाद किसी भी अन्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया।
‘‘विषबाण’’ के पास उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार शिक्षक भर्ती घोटाले एवं सट्टा कारोबार से जुड़े सटोरियों के भाजपा-संघ के वरिष्ठ नेताओं-
पदाधिकारियों से नजदीक सम्बंध हैं। संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं का तो यहां तक कहना है कि संघ के कुछ वरिष्ठ
पदाधिकारी गलत लोगों का साथ देकर काली कमाई करने में किसी नेता से पीछे नजर नहीं आ रहे हैं। शिक्षा घोटाले से जुड़े सूत्रों का तो यह भी दावा है कि शिक्षक भर्ती घोटाले के प्रमुख आरोपी एक सत्ता पार्टी के दूसरे राज्य में स्थित ठिकाने पर मामला निपटने तक सुरक्षित छिपे हुए हैं। एसएसपी के तबादले को लेकर 5 करोड़ वसूलने की चर्चाएं तो अन्दर खाने चल रहीं हैं लेकिन इसकी पुष्टि के लिये या अपना मुंह खोलने के लिये कोई तैयार नहीं है।