अयोध्या विवादः ऐसा होगा वीएचपी का राममंदिर निर्माण, जानें पूरे घटना क्रम

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अयोध्या/फैजाबाद : गुजरात चुनाव के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर जोर-शोर से गर्मा रहा है वहीं दूसरी तरफ विवादित ढ़ांचे को ढ़ाहने की 25वीं वरसी पर उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में तनाव का माहौल रहा वहीं दूसरी तरफ विश्व हिन्दू परिषद भी श्रीराम मंदिर के नए माॅडल के साथ हुंकार भरता नजर आ रहा हैै। आईए जानते हैं राममंदिर निर्माण से जुड़े प्रमुख पहलुओं को…

भले ही अभी सुप्रीम कोर्ट की ओर से अयोध्या के विवादित स्थल को लेकर फैसला आने में वक्त लगने वाला हो लेकिन विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण की तैयारी पूरी कर ली है। कारसेवकपुरम में इस मंदिर के आकार-प्रकार का पूरा मॉडल तैयार रखा है। यदि राम मंदिर के पक्ष में फैसला आया तो वीएचपी के मुताबिक राम मंदिर कैसा होगा? पढ़िए यह रिपोर्ट…

जानिए क्या होगी लंबाई-चौड़ाई?
अयोध्या के कारसेवकपुरम में राम मंदिर का जो मॉडल रखा है, उसके मुताबिक श्रीराम मंदिर दो मंजिला भवन होगा। इस भव्य मंदिर की लंबाई 268 फीट, चौड़ाई 140 फीट और ऊंचाई 128 फीट होगी।
नृत्य मंडप, गर्भ गृह समेत 6 भागों में होगा मंदिर
मंदिर को प्रमुख रूप से 6 भागों में बांटा जाएगा। इसमें सिंह द्वारा, नृत्य मंडप, रंग मंडप, कोली, गर्भ गृह और परिक्रमा शामिल होंगे। इसके साथ ही गर्भ गृह के चारों ओर बनने वाले परिक्रमा मार्ग की चौड़ाई 10 फीट होगी। इस भवन के भूतल पर भगवान राम बालरूप में यानी ‘रामलला’ के रूप में विराजमान होंगे। इसके इतर प्रथम तल पर राम दरबार होगा।
24 दरवाजों के साथ भव्य राम मंदिर
मंदिर में दोनों तलों पर 106-106 खंभे यानी कुल 212 खंभे होंगे। भूतल के खंभों की ऊंचाई 16.6 फीट और ऊपरी मंजिल के खंभों की ऊंचाई 14 फीट 6 इंच होगी। इस भवन में कुल 24 दरवाजे होंगे। प्रस्तावित मंदिर के निर्माण में कहीं भी लोहे या सीमेंट का इस्तेमाल नहीं होगा।
7 लाख रुपये की लागत से बना मॉडल
प्रस्तावित मंदिर का जो मॉडल कारसेवकपुरम में रखा है, वह 7 मीटर लंबा, 3.6 मीटर चौड़ा और 3.2 मीटर ऊंचा है। 7 लाख रुपये की लागत से बना यह मॉडल संगमरमर और थर्मोकोल से बनाया गया है।

कब से राम मंदिर विवाद

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवादित ढांचा गिराए जाने की 25वीं वर्षगांठ से एक दिन पहले यानी 5 दिसंबर को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद हुई जिसकी अगली सुनवाई अगली सुनवाई 8 फरवरी 2018 को होगी। जाने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में अब तक क्या-क्या हुआ है…
1528: बाबर ने यहां एक मस्जिद का निर्माण कराया जिसे बाबरी मस्जिद कहते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार इसी जगह पर भगवान राम का जन्म हुआ था.
1853: हिंदुओं का आरोप कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ. मुद्दे पर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पहली हिंसा हुई.
1859: ब्रिटिश सरकार ने तारों की एक बाड़ खड़ी करके विवादित भूमि के आंतरिक और बाहरी परिसर में मुस्लिमों और हिदुओं को अलग-अलग प्रार्थनाओं की इजाजत दे दी.
1885: मामला पहली बार अदालत में पहुंचा. महंत रघुबर दास ने फैजाबाद अदालत में बाबरी मस्जिद से लगे एक राम मंदिर के निर्माण की इजाजत के लिए अपील दायर की.
23 दिसंबर 1949: करीब 50 हिंदुओं ने मस्जिद के केंद्रीय स्थल पर कथित तौर पर भगवान राम की मूर्ति रख दी. इसके बाद उस स्थान पर हिंदू नियमित रूप से पूजा करने लगे. मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया.
16 जनवरी 1950: गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत में एक अपील दायर कर रामलला की पूजा-अर्चना की विशेष इजाजत मांगी.
5 दिसंबर 1950: महंत परमहंस रामचंद्र दास ने हिंदू प्रार्थनाएं जारी रखने और बाबरी मस्जिद में राममूर्ति को रखने के लिए मुकदमा दायर किया. मस्जिद को ‘ढांचा’ नाम दिया गया.
17 दिसंबर 1959: निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने के लिए मुकदमा दायर किया.
18 दिसंबर 1961: उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया.
1984: विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने बाबरी मस्जिद के ताले खोलने और राम जन्मस्थान को स्वतंत्र कराने व एक विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया. एक समिति का गठन किया गया.
1 फरवरी 1986: फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिदुओं को पूजा की इजाजत दी. ताले दोबारा खोले गए. नाराज मुस्लिमों ने विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया.
जून 1989: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने वीएचपी को औपचारिक समर्थन देना शुरू करके मंदिर आंदोलन को नया जीवन दे दिया.
1 जुलाई 1989: भगवान रामलला विराजमान नाम से पांचवा मुकदमा दाखिल किया गया।
9 नवंबर 1989: तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने बाबरी मस्जिद के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी.
25 सितंबर 1990: बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली, जिसके बाद साम्प्रदायिक दंगे हुए.
नवंबर 1990: आडवाणी को बिहार के समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया. बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया.
अक्टूबर 1991: उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार ने बाबरी मस्जिद के आस-पास की 2.77 एकड़ भूमि को अपने अधिकार में ले लिया.
6 दिसंबर 1992: हजारों की संख्या में कार सेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढाह दिया. इसके बाद सांप्रदायिक दंगे हुए. जल्दबाजी में एक अस्थायी राम मंदिर बनाया गया.
16 दिसंबर 1992: मस्जिद की तोड़-फोड़ की जिम्मेदार स्थितियों की जांच के लिए लिब्रहान आयोग का गठन हुआ.
जनवरी 2002: प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यालय में एक अयोध्या विभाग शुरू किया, जिसका काम विवाद को सुलझाने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों से बातचीत करना था।
अप्रैल 2002: अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की.
मार्च-अगस्त 2003: इलाहबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का दावा था कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले हैं. मुस्लिमों में इसे लेकर अलग-अलग मत थे.
सितंबर 2003: एक अदालत ने फैसला दिया कि मस्जिद के विध्वंस को उकसाने वाले सात हिंदू नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाए.
जुलाई 2009: लिब्रहान आयोग ने गठन के 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी.
28 सितंबर 2010: सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले का मार्ग प्रशस्त किया.
30 सितंबर 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े में जमीन बंटी.
9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी.
जुलाई 2016: बाबरी मामले के सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का निधन
21 मार्च 2017: सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की बात कही
19 अप्रैल 2017: सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया