“शर्त लगा लो अब गांधी जी भी बंदूक उठा लेंगे”

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गत दिवस बुन्देलखण्ड के महोबा जनपद के कबरई विकासखंड अंतर्गत सिचौरा गांव में वार्षिक मेले के दौरान 2 दिवसीय रामलीला एवं कवि सम्मेलन का शानदार आयोजन किया गया । जिसमें देश के विभिन्न अंचलों से आये मंचीय कलाकारों एवं कवियों ने अपनी धर्मिता का लोहा मनवाया । बताते चलें कि श्री दक्षिणेश्वर नवयुवक रामलीला कमेटी द्वारा यह 21वां रामलीला एवं चौथा कल्पतरु कवि सम्मेलन का ऐतिहासिक आयोजन था।  कल्पतरु कवि सम्मेलन का संचालन एवं संयोजन का उत्तर दायित्व मुम्बई की एक बहुत बड़ी कम्पनी का बिजनिस मैनेजर ने किया । कार्यक्रम में श्री शिव शक्ति डासना गाजियाबाद के महंत नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज, हिन्दू स्वाभिमान के कार्यकारी अध्यक्ष बाबा परमेन्द्र आर्य (रिटायर्ड फौजी), कबीर विज्ञान आश्रम बड़ईया (उत्तर प्रदेश) के उपाचार्य सज्जनदास जी महाराज ने क्रमशः धर्म उद्बोधन, दीप प्रज्वलन एवं आशीर्वचन दिया । इस ऐतिहासिक आयोजन में इस वर्ष कल्पतरु साहित्य सेवा सम्मान श्री सुनहरी लाल वर्मा ‘तुरन्त’, दिल्ली ( सब. टी.वी. स्टार), एवं श्री मुकेश मोलवा, राजस्थान ( राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त ओज कवि एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी विश्व हिंदू परिषद) को दिया गया । कार्यक्रम के अनुसार ही कवि ‘चेतन’ नितिन खरे कृत ‘श्री कल्पवृक्ष चालीसा का ऑनलाइन विमोचन भी किया गया ।

कवि सम्मेलन के दौरान संचालक कवि ‘चेतन’ नितिन खरे ने डॉ. कुंवर बेचैन साहब की पंक्तियों-

पूरी धरा भी साथ दे तो और बात है,
तू जरा भी साथ दे तो और बात है,
चलने को एक पांव से भी चल रहे हैं लोग,
पर दूसरा भी साथ दे तो और बात है,

से किया  । कवि प्रभात परवाना ने कहा-

भारत माँ का हाल देखकर बापू शीश झुका लेंगे,
शर्त लगा लो अब गांधी जी भी बंदूक उठा लेंगे,

कवि सर्वेश त्रिपाठी (इलाहाबाद) ने कहा-

ये मेरे पांव के छालों ने ही बतला दिया होगा,
कि मैंने प्रीत पर्वत की परीक्षा पार कर ली है,

कवि कार्तिकेय शुक्ला ( झांसी) ने मधुर मधुर श्रृंगारिक गीतों की बरसात की । कवि सुनहरी लाल वर्मा ‘तुरन्त’ ने गुदगुदाते हुए कहा-
अपनी लाड़ो बिटिया को कुछ दिन बुलवा लो पापा जी’

कवि ‘चेतन’ नितिन खरे ने कहा-

पहुंचकर भी बुलन्दी पर कभी अभिमान मत करना,
किसी सच्चे तपस्वी का कभी अपमान मत करना,
बात कहना सदा ऐसी दिलों में प्रेम भर दे जो,
दिलों में मैल हो जिनके वहां जलपान मत करना,

कवि अमित शर्मा ने कहा-

युवा देश का जब जब रण में अपनी ताकत टोलेगा,
चप्पा चप्पा इस धरती का वंदेमातरम बोलेगा,
दिनकर वाली कलम न छेड़ो शोला है जल जाओगे,
हमने गर हुंकार भरी तो सिंहासन भी डोलेगा,

कवि मुकेश मोलवा ने कहा-

‘होकर रणचण्डी सा निर्भय बोले’……….

आशीर्वचन के दौरान धर्मगुरु नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने उपस्थित जनसमुदाय का मार्गदर्शन किया ।कार्यक्रम के उपरांत समस्त कवियों के साथ साथ समाजसेवा के लिए जगभान सेंगर (कवि एवं समाजसेवी), राजनारायण खरे (कवि एवं समाजसेवी), सचिन खरे, शिवशरण सिंह, किशनपाल सिंह, कृष्णकुमार सिंह, रामशरण सिंह, नरेंद्र मिश्रा सहित दो दर्जन से ज्यादा लोगों को सम्मानित किया गया।