एक भारतीय राजा जिसने विश्व की सबसे महंगी गाड़ियों से फिकवाया गोबर

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भारत के राजा-महाराजा संपूर्ण विश्व में अपने शाही अंदाज के लिए जाने जाते हैं। स्वतंत्र युग से पूर्व एक समय ऐसा भी था जब दुनिया की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी रॉल्स रॉयस को एक भारतीय राजा से माफी मांगनी पड़ी थी। इस दुर्घटना के बाद इस कंपनी ने को एक बड़ा सबक मिला।

मिर्जा राजा जयसिंह (15 जुलाई, 1611 – 28 अगस्त, 1667) आम्बेर के राजा तथा मुगल साम्राज्य के वरिष्ठ सेनापति (मिर्जा राजा) थे। एक दिन लंदन भ्रमण के दौरान राजा जयसिंह सीदे-सादे कपड़ों में लंदन की बांड स्ट्रीट की सैर कर रहे थे। इसी बीच उनकी नजर रोल्स रॉयस कार के शोरूम पर पड़ी। कार उन्हें देखने में आकर्षक लगी जिसके चलते कार की कीमत को पूछने के लिए वे शोरूम में घुस गए। राजा को अन्य भारतीयों की तरह मानते हुए शोरूम के सेल्समैन ने उन्हें बुरी तरह झिड़का और बेइज्जती करके उनको वहां से भगा दिया। खुद के साथ हुई बदसलकूी से महाराजा जय सिंह इतने खफा हो गए कि उन्होंने कंपनी को सबक सिखाने की ठान ली।  बेइज्जती के बाद राजा जयसिंह अपने होटल के कमरे में वापस आए और अपने नौकर से कहा कि शोरूम के मालिक को फोन करके बताओ ‍‍कि अल्वर के राजा उनकी कार खरीदने के इच्छुक हैं।

कुछ घंटों बाद राजा फिर से शोरूम पहुंच गए पर इस बार वे साधारण कपड़ों में नहीं थे बल्कि पूरे राजसी ठाठ में पहुंचे। इस बार उनके पहुंचने के पहले ही खूबसूरत लाल कारपेट जमीन पर बिछ चुकी थी और सारे सेल्समैन बड़े सम्मान से सिर झुकाकर उनका अभिवादन ले रहे थे। राजा ने शोरूम में मौजूद सभी 6 कारें खरीद लीं, शर्त रखी कि कार के साथ-साथ वह ‘बदतमीज़’ सेल्समैन भी भारत में उनके महल तक पहुंचाया जाए।

इसके बाद जब भारत पहुंचे तो महाराजा ने उस सेल्समैन के सामने नगरपालिका विभाग को आदेश दिया कि उन सभी चमचमाती कारों से पूरे एक महीने तक शहर की गंदगी को ढोने व सफाई के काम के लिए किया जाए। जब यह बात पूरे विश्व में फैली की विश्व की नं. 1 कार रोल्स रॉयस का इस्तेमाल कचरा ढोने के लिए किया जा रहा है।

तो रातों रात कंपनी की साख मिट्टी में मिल गई। जब भी कोई यूरोप और अमेरिका में रोल्स रॉयस कार होने का दावा करता था तो लोग उस पर हंसते थे और पूछते थे कि कौन वाली कार है तुम्हारे पास?  कहीं वही कार तो नहीं जो भारत में कचरा ढोला के लिए इस्तेमाल की जाती है? इस तरह से प्रतिष्ठा के लगातार गिरने से कार की खरीद दिन-ब-दिन कमजोर होने लगी जिसकी वजह से कंपनी के मालिक की आमदनी कमजोर पड़ने लगी। इसके चलते कंपनी ने भारत में राजा को टेलीग्राम में माफी लिखकर भेजी और विनती की कि रोयस रॉयल कार से कचरा न उठवाएं यही नहीं,  कंपनी ने राजा को 6 कारें भेंट स्वरूप फ्री में भेजीं। जब राजा जयसिंह को यह पता लगा कि रॉयल रॉयस वालों को उनकी गलती का सबक मिल चुका है तब जाकर राजा ने उन कारों से कचरा साफ करना बंद करवाया।