एक श्राप के चलते इस राजघराने में 400 साल से नहीं जन्मा कोई राजकुमार…

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मैसूर राजवंश की एक कहानी है जिस पर यकीन करना मुश्किल है। ये कहानी है एक श्राप की। श्राप और शापित जैसे शब्द आपको अपने इंडिया में ही ज्यादा सुनने को मिलते हैं, लेकिन ये सब घटित भी तो यहीं होता है। आपको बता दें कर्नाटक के मैसूर राजवंश में पिछले 400 सालों से कोई बेटा पैदा नहीं हुआ है और इसका कारण बताया जाता है एक रानी का इस राजवंश को दिया गया श्राप। आपका इस पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल ज़रूर है, लेकिन सच्चाई को कौन छुपा सकता है। आइए जानते हैं क्या है इस श्राप की पूरी कहानी।

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मैसूर पैलेस मैसूर राजवंश के उतार-चढ़ाव का गवाह रहा है। भले ही ये महल 1912 में बनकर तैयार हुआ, लेकिन ये पैलेस वाडियार राजवंश के 600 सालों के इतिहास को बयां करता है। मैसूर राजघराने पर राज करने वाले वाडियार राजवंश का इतिहास शुरू होता है सन 1399 से। यानी मैसूर राजवंश भारत में अब तक सबसे ज्यादा लंबे वक्त तक राजशाही परंपरा को निभाने वाला वंश है। लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि पिछले 5 सदियों से इस राजवंश को चलाने वाले महारानी की कोख से जन्म नहीं लेते। सन् 1612 के बाद से इस राजवंश के राजा-रानी को कोई पुत्र पैदा नहीं हुआ। हर बार दत्तक पुत्र को ही राजा बनाया जाता है। मैसूर राजघराने के मौजूदा राजा यदुवीर वाडियार को भी गोद ही लिया गया है। महारानी प्रमोदा देवी ने अपने पति श्रीकांतदत्त नरसिम्हराज वाडियार की बड़ी बहन के बेटे यदुवीर को गोद लेकर उसे राजा घोषित किया।

बताया जाता है कि पिछले चार सौ सालों से एक श्राप इस राजघराने का पीछा कर रहा है। मैसूर राजघराने को लेकर मान्यता है कि 1612 में दक्षिण के सबसे शक्तिशाली विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद वाडियार राजा के आदेश पर विजयनगर की अकूत धन संपत्ति लूटी गई थी। उस समय विजयनगर की तत्कालीन महारानी अलमेलम्मा हार के बाद एकांतवास में थीं। लेकिन उनके पास काफी सोने, चांदी और हीरे- जवाहरात थे। वाडियार ने महारानी के पास दूत भेजा कि उनके गहने अब वाडियार साम्राज्य की शाही संपत्ति का हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें दे दें। लेकिन अलमेलम्मा ने गहने देने से इनकार कर दिया। इसके बाद शाही फौज ने ज़बरदस्ती ख़ज़ाने पर कब्जा करने की कोशिश की। इससे दुखी होकर महारानी अलमेलम्मा ने श्राप दिया कि जिस तरह तुम लोगों ने मेरा घर ऊजाड़ा है उसी तरह तुम्हारा देश वीरान हो जाए। इस वंश के राजा- रानी की गोद हमेशा सूनी रहे। इसके बाद अलमेलम्मा ने कावेरी नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली।

आज भी राजपरिवार के पास 10 हजार करोड़ की संपत्ति

एक अनुमान के मुताबिक मैसूर राजपरिवार के पास 10 हजार करोड़ की संपत्ति है। भले ही राजशाही खत्म हो गई है, लेकिन इस महल को देखकर आप रजवाड़ों के वैभव का अंदाज़ा लगा सकते हैं। राजा का शासन खत्म हो गया है, लेकिन अब भी खास मौकों पर यहां राजा का दरबार सजता है।

जून 2016 में  मैसूर के वाडियार राजघराने के राजा यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार और राजस्थान के डूंगरपुर की राजकुमारी त्रिशिका कुमारी सिंह के साथ विवाह के बंधन में बंध थे। मैसूर राजघराने में 40 साल बाद यह शादी हुई। मैसूर के ऐतिहासिक अंबा विला पैलेस में यह शाही शादी संपन्न हुई। महल के ‘कल्याण मंडप’ में कई पुजारियों ने लगभग 1000 मेहमानों की मौजूदगी में इस विवाह को संपन्न करवाया था।

यदुवीर के महाराज बनने और उनकी शादी के बाद मैसूर पैलेस में फिर से खुशियां नजर आने लगीं।। यदुवीर के चाचा महाराज श्रीकांतदत्ता नरसिम्हा राजा वाडियार की 2013 में मौत के बाद दशहरा सेलिब्रेशन में तब्दीली ला दी गई थी। साल 2015 में महारानी ने दशहरे पर होने वाली कई रस्मों पर रोक दिया था। बता दें कि करीब 40 साल बाद मैसूर के राजमहल में शादी की शहनाई बजी। इससे पहले अम्बा विलास राजमहल मे दिवंगत महाराज श्रीकांतदत्त नरसिम्हराज वडियार ने 1976 में प्रमोदा देवी से शादी की थी।