आगरा में कितने कौवे?

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एक दिन बादशाह सलामात दरबार में सबसे पहले आए और पीछे जितने भी दरबारी आते गए उन सबसे यही पूछते गए-‘‘आगरा में कौओं की संख्या कितनी है?’’
सभी दरबारी चुप होते गए, किसी ने भी झूठ-सच कुछ भी उत्तर नहीं दिया। तब तक बीरबल भी दरबार में आ पहुंचे। बादशाह ने वहीं प्रश्न उनसे भी पूछा।
बीरबल ने तुरंत जवाब देते हुए कहा-‘‘गरीबपरवर! पिछले साल उनकी गणना करवाई थी, केवल आगरा शहर में ही पन्द्रह सौ पचास कौवे निकले थे।’’
बादशाह बीरबल से कौओं की स्पष्ट गणना सुनकर आश्चर्यवचकित रह गए और पूछा-‘‘तुमने पिछले साल गणना कब करवाई थी? उसका प्रमाण दो। मुझे मर्दशुमारी में शक है।’’
बीरबल ने उत्तर दिया-‘‘पृथ्वीनाथ! यह गणना रत्ती-पाई सही है।’’
बादशाह ने कहा-‘‘अगर इसमें एक नम्बर की भी कमीबेशी होगी तो तुमसे पांच हजार दो सौ सत्तर रूपये दण्ड के रूप में वसूले जाएंगे। आज शाम तक का मौका है, भलीभांति सोच-विचार कर उत्तर दो।’’
बीरबल ने कहा-’’जहांपनाह! मेरी गणना बिल्कुल ठीक है। फिर भी गणना करने पर इतने ही कौवे निकलेंगे। कमीबेशी तब होगी जब यहां से कुछ कौवे बाहर गए होंगे या बाहर से मेहमानदारी निभाने के लिए यहां आए होंगे।’’