हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल थे अकबर-बीरबल

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सम्राट अकबर यानी जलालु़द्दीन मुहम्मद अकबर न केवल मुगलिया सल्तनत के एक यशस्वी सम्राट हुए हैं, बल्कि वे भारत भूमि में धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक भी बने। हिन्दु-मुस्लिम एकता की जो मिसाल अकबर के शासन काल में देखने को मिलती थी, वैसी उनके पूर्ववर्ती राजाओं के शासनकाल में नहीं थी।
अकबर के बारे में कहा जाता है कि वे पढ़े-लिखे नहीं थे, मगर गुणग्राहक इन्सान अवश्य थे। अपने दरबार में उन्होंने चुन-चुन कर नौ रत्नों को स्थान दे रखा था। प्रत्येक विषय में उन नौ रत्नों से सलाह-मशविरा करके ही वे राज-काज चलाया करते थे।
अकबर के नौ रत्नों में सबसे अधिक ख्याति मिली बीरबल को। एक प्रकार से बीरबल अकबर के और अकबर बीरबल के प्रतीक बन गए। जहां एक का नाम आता है, वहीं दूसरे का नाम अपने आप आ जाता है। वे एक-दूसरे के पूरक थे।
बीरबल के बारे में कहा जाता है कि वे न केवल हास्य सरावतार थे, बल्कि हाजिर-जवाब इतने थे कि उनकी समझ से कोई बात छूटकर न जा पाती थी। जब भी, जैसा भी प्रश्न उनसे किया जाता, दो टूक उत्तर देकर वे अपनी हाजिर जवाबी प्रस्तुत कर सामने वाले को प्रभावित कर दिया करते थे।
बीरबल की इस हाजिरजवाबी से अन्य दरबारी अकबर से ईष्या किया करते थे, मगर बीरबल को उनकी परवाह न थी। अपनी योग्यता का वे हमेशा ही लोहा मनवा लिया करते थे।
अकबर बीरबल के ऐसे तमाम लतीफों, चुटकुलों, हास्य-व्यंग्य, मनोविनोद और नोंकझोंकों को चुन-चुनकर इस संकलन में स्थान दिया गया है। संकलन आपका पूर्ण मनोरंजन करेगा, ऐसा विश्वास है।